1960 के दशक में शुरू हुई Green Revolution भारत को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाया

यही वो दौर था जहां से Agricultural Mechanization की वास्तविक शुरुआत हुई

उच्च उपज वाली किस्मों (HYV) के बीजों ने जहां उत्पादन बढ़ाया

उनकी कटाई, गहाई और सिंचाई के लिए मशीनों की ज़रूरत महसूस हुई

ट्रैक्टर, ट्यूबवेल, पंपसेट, थ्रेशर और कम्बाइन हार्वेस्टर जैसी मशीनों ने खेती का चेहरा बदला

मशीनों की मदद से समय पर जुताई, बुआई, सिंचाई,कटाई होने लगी, जिससे उत्पादन बढ़ा

इस दौर को ‘ट्रैक्टर क्रांति’ का नाम भी दिया गया, घरेलू स्तर पर ट्रैक्टर बनाने का कारोबार बढ़ा