गौपालन को जैविक खेती का अभिन्न हिस्सा माना गया है
कीटनाशक के रूप में गोमूत्र की मांग और इस्तेमाल भी काफी बढ़ा है
देश की कुल गायों में से तीन-चौथाई यानी करीब 15 करोड़ गायें देसी नस्लों की हैं
मौजूदा दौर में प्रगतिशील किसानों का देसी गायों की डेयरी के प्रति रुझान भी बढ़ा रहा है
देसी नस्लों की गायें पालने में लागत के मुकाबले ख़ासी कमाई होती है
भारत में देसी गायों की कम से कम 26 उम्दा नस्लों को उन्नत माना जाता है
देसी गायों की उपयुक्त नस्ल का चुनाव करें तो उन्हें बेहतर आमदनी मिल सकती है
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