‘सी बकथॉर्न’ को लाहौल और स्पिति ज़िले की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के लिए वरदान है
‘सी बकथॉर्न’ का उल्लेख तिब्बत की प्राचीन ‘अमची’ चिकित्सा पद्धति और आठवीं सदी के तिब्बती साहित्य में मिलता है
तिब्बत के मेडिकल लिट्रेचर ‘सीबू येदिया’ के पूरे 30 पेज़ पर के औषधीय गुणों के बखान है
शोध से पता लगा कि ‘सी बकथॉर्न’ बेरी के फलों के साथ पतियां, तना, जड़ें और कांटे भी गुणकारी हैं
‘सी बकथॉर्न’ बेरी को ‘वंडर प्लांट’ और ‘हिमालयन गोल्ड’ का ख़िताब मिला है
DIHAR ने ‘सी बकथॉर्न’ के फलों का जूस तैयार करने की तकनीक विकसित है
नई तकनीक से ‘सी बकथॉर्न’ का जूस सियाचिन, द्रास या कारगिल जैसे बेहद ठंडे इलाकों में जमता नहीं है
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