भेड़ पालन मुख्य रूप से तीन उत्पादों के लिए किया जाता है, ऊन,मीट और दूध

आम तौर पर भेड़ पालन का काम पशुपालक पुश्तैनी पेशों की तरह ही करते हैं

खेती के साथ भेड़ पालन पर खर्च ज़्यादा नहीं होत,क्योंकि भेड़ें घास या खरपतवार खाकर ही विकसित होती है

भेड़ पालकों के लिए भी सरकारी स्कीम और सब्सिडी मिलती है

सरकार से एक लाख रुपये तक का कर्ज़ ले सकते हैं, इसमें 10% रक़म ख़ुद जुटानी पड़ती है

दूसरी योजना में अगर 3 लाख रुपये का कर्ज़ ले तो ब्याज़ सिर्फ़ ढाई लाख रुपये चुकाना होगा

भेड़ पालन से जुड़े कर्ज़ को चुकाने की अधिकतम मियाद 9 साल की होती है