Vedic Farming या वैदिक खेती की उत्पत्ति ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, और अथर्ववेद से होती है

ये ग्रंथ 1500 ईसा पूर्व से 500 ईसा पूर्व के बीच रचे गए थे,वैदिक दर्शन,विज्ञान,संस्कृति के आधार हैं

इन ग्रंथों में कृषि गतिविधियों जैसे मिट्टी की तैयारी,फसल प्रबंधन,औषधियों के इस्तेमाल के बारें में बताया गया है

इसमें मिट्टी की उर्वरता,फसल स्वास्थ्य में सुधार के लिए अनुष्ठानों, मंत्रों व निर्देश दिये गये हैं

इनके प्रारंभिक समर्थक ऋषि पराशर थे,जिनकी कृति ‘कृषि पाराशर’ सबसे प्राचीन ज्ञात कृषि ग्रंथों में से एक है

आज के वक्त में, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु,आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में वैदिक खेती की जा रही है

वैदिक खेती को बढ़ावा देने वाले प्रमुख लोग, जैसे सुभाष पालेकर, शून्य बजट प्राकृतिक खेती के जनक माने जाते हैं