PMFME योजना से बदली किस्मत, झाबुआ के भेरूलाल बने आत्मनिर्भरता की मिसाल

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) केंद्र सरकार की एक अहम पहल है, जिसका उद्देश्य छोटे खाद्य उद्यमियों और पशुपालकों को सशक्त बनाना है। यह योजना खासतौर पर असंगठित खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को संगठित करने पर जोर देती है।

मध्य प्रदश के झाबुआ जिला के रायपुरिया गांव के रहने वाले भेरूलाल मकवाना आज ग्रामीण आत्मनिर्भरता की एक  कहानी बन चुके हैं। भेरूलाल सिर्फ़ 12वीं तक पढ़े हैं और पहले उनकी सालाना आय करीब ढाई लाख रुपये थी, जिससे परिवार का गुजारा करना मुश्किल होता था। लेकिन कुछ अलग करने की सोच ने उन्हें प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) से जोड़ दिया।

उन्होंने उद्यान विभाग के मार्गदर्शन और स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया से लोन लेकर ‘पीतांबरा डेयरी फ़ार्म’ की शुरुआत की। आज उनका डेयरी व्यवसाय न केवल दूध उत्पादन कर रहा है, बल्कि अपने ब्रांड के साथ बाज़ार में पहचान भी बना चुका है। भेरूलाल का कहना है कि पहले आय सीमित थी, लेकिन अब वे खुद को आत्मनिर्भर महसूस करते हैं और उनका कारोबार लगातार बढ़ रहा है।

उद्यानिकी अधिकारी बी.एस. चौहान के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य गांव स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना और लोगों को खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित करना है।

क्या है PMFME योजना और कैसे मिल रहा लाभ

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) केंद्र सरकार की एक अहम पहल है, जिसका उद्देश्य छोटे खाद्य उद्यमियों और पशुपालकों को सशक्त बनाना है। यह योजना खासतौर पर असंगठित खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को संगठित करने पर जोर देती है।

पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण में नए मौके

इस योजना के तहत किसान अब सिर्फ़ कच्चा माल बेचने तक सीमित नहीं हैं। वे दूध, अंडा, मांस और मछली जैसे उत्पादों का प्रसंस्करण कर खुद का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। डेयरी, पोल्ट्री और फिशरी सेक्टर में छोटे उद्योग तेजी से बढ़ रहे हैं।

‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) की भूमिका

योजना में ‘एक जिला एक उत्पाद’ रणनीति को बढ़ावा दिया गया है, जिससे हर जिले के खास उत्पाद को पहचान और बाज़ार मिलता है।

आर्थिक सहायता और सब्सिडी

  • नई यूनिट लगाने या विस्तार के लिए 35% तक सब्सिडी (अधिकतम ₹10 लाख)
  • स्वयं सहायता समूहों को शुरुआती पूंजी के रूप में सहायता
  • बैंक ऋण लेने में सहयोग

प्रशिक्षण और तकनीकी मदद

सरकार उद्यमियों को फूड सेफ्टी, पैकेजिंग और मार्केटिंग की ट्रेनिंग भी देती है, जिससे वे अपने उत्पाद को बेहतर तरीके से बाज़ार में उतार सकें। भेरूलाल मकवाना की सफ़लता यह दिखाती है कि अगर सही योजना का लाभ लिया जाए, तो छोटे गांव से भी बड़ी सफ़लता हासिल की जा सकती है। PMFME योजना आज ऐसे ही हज़ारों लोगों के लिए आत्मनिर्भर बनने का मजबूत जरिया बन रही है।

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