Natural Farming: प्राकृतिक खेती अपनाकर सुरेंद्र भारती ने बनाया शानदार खेती मॉडल
सुरेंद्र भारती की प्राकृतिक खेती से सब्ज़ियों की बेहतर पैदावार और कम लागत का सफल मॉडल सामने आया।
जैविक और प्राकृतिक खेती के फायदे और तकनीकों का अन्वेषण करें। स्वस्थ जीवन के लिए जैविक खेती के लाभ जानें। किसान ऑफ इंडिया पर हमारे गाइड के साथ स्वास्थ्यपूर्ण खेती की दुनिया में कदम बढ़ाएं।
सुरेंद्र भारती की प्राकृतिक खेती से सब्ज़ियों की बेहतर पैदावार और कम लागत का सफल मॉडल सामने आया।
अजय रत्न ने प्राकृतिक खेती से कम लागत में सफल खेती का मॉडल बनाया, जो आज कई किसानों को प्रेरित कर रहा है।
प्राकृतिक खेती अपनाकर बुद्धि राम ने पीला रतुआ से फ़सल बचाई, लागत घटाई और आमदनी बढ़ाई।
पुलिस अधिकारी जरनैल सिंह ने प्राकृतिक खेती अपनाकर सफलता की मिसाल पेश की। उनकी ऑर्गेनिक गोल्ड पहल किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।
प्राकृतिक खेती अपनाकर ज्ञान चंद ने कम पानी में बेहतर खेती की, लागत घटाई और कई किसानों को नई राह दिखाई।
प्राकृतिक खेती अपनाकर रोशन लाल ने खेती का ख़र्च घटाया, अच्छी फ़सल ली और गांव के युवाओं के लिए नई मिसाल बने।
प्राकृतिक खेती अपनाकर कंचन ने खेती की लागत घटाई, बागवानी सुधारी और गांव के किसानों को नई राह दिखाई।
प्राकृतिक खेती अपनाकर प्रेमपाल ने नौकरी छोड़ खेती को चुना, लागत घटाई और फ़सलों से बेहतर कमाई हासिल की।
प्राकृतिक खेती अपनाकर ठाकुर दास ने खेती का ख़र्च घटाया, आमदनी बढ़ाई और कई किसानों को नई राह दिखाई।
प्रगतिशील किसान बालक राम ने प्राकृतिक खेती अपनाकर खेती का खर्च घटाया, फ़सलों की गुणवत्ता सुधारी और किसानों को नई राह दिखाई।
प्राकृतिक खेती (Natural Farming) अपनाकर संगत राम ने खेती की लागत घटाई, फ़सलों की गुणवत्ता बढ़ाई और किसानों को नई राह दिखाई।
प्राकृतिक खेती अपनाकर ओम प्रकाश ने एग्रो टूरिज्म से खेती को जोड़ा और किसानों के लिए नया मॉडल तैयार किया।
नवरूप सिंह का Natural Farming और पारंपरिक जीवनशैली पर आधारित मॉडल आज चर्चा में है।
Global Rajasthan Agritech Meet 2026: 3 मई (शनिवार) को हुई उच्चस्तरीय बैठक में कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने साफ निर्देश दिए। गर्मी के मौसम में किसानों को पेयजल, छाया, सरस की ठंडी लस्सी और अन्य सुविधाओं में कोई कमी न रहे। GRAM 2026 सिर्फ एक मेला नहीं, ये राजस्थान के किसानों के उज्ज्वल भविष्य का नक्शा है।
प्राकृतिक खेती अपनाकर शंभू लाल ने घटाई लागत, बढ़ाई आय और खेती को बनाया टिकाऊ व लाभकारी।
कुल्लू जिले के रहने वाले किसान दिवान चंद ने प्राकृतिक खेती अपनाकर घटाई लागत, सुधारी मिट्टी की सेहत और खेती को बनाया लाभकारी।
ललित कालिया ने प्राकृतिक खेती को अपनाकर यह साबित किया है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन संभव है। उन्होंने मात्र 18 मरले भूमि पर गन्ने की खेती की और पहले ही सीजन में करीब 70 किलोग्राम शक्कर तैयार कर ली।
National Bank for Agriculture and Rural Development (NABARD) जनजातीय विकास कार्यक्रम के तहत “जीवा परियोजना” का संचालन कर रहा है।
प्राकृतिक खेती अपनाकर अनीता नेगी ने बंजर ज़मीन को उपजाऊ बनाया और किसानों के लिए प्रेरणा बनीं।
आंध्र प्रदेश के पश्चिम गोदावरी ज़िले के सीथमपेटा गाँव के रहने वाले सतीश कॉमर्स में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। नौकरी के पीछे न जाते हुए उन्होंने अपनी पारंपरिक खेती को आगे बढ़ाने का फैसला किया और पशु आधारित जैविक खेती को चुना।