भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में मानव वन्यजीव संघर्ष पर हुई अहम बैठक, तकनीक और राज्यों के समन्वय से बनेगी नई रणनीति

भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में मानव वन्यजीव संघर्ष पर बैठक हुई। तकनीक, सामुदायिक भागीदारी और राष्ट्रीय समन्वय पर ज़ोर दिया गया।

देश में बढ़ते मानव वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर नई रणनीति तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में नई दिल्ली में मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को रोकने, आधुनिक तकनीक के बेहतर उपयोग, राज्यों के अनुभवों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह, विभिन्न राज्यों के सांसद, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, प्रमुख वन संरक्षक (PCCFs) और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक भी शामिल हुए। भूपेंद्र यादव ने कहा कि मानव वन्यजीव संघर्ष का समाधान केवल एक विभाग या राज्य के प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और समन्वित रणनीति ज़रूरी है।

भूपेंद्र यादव ने समीक्षा की पिछली बैठक में लिए गए फैसलों की

बैठक के दौरान पिछली संसदीय सलाहकार समिति की बैठक में दिए गए निर्देशों पर हुई प्रगति की भी समीक्षा की गई। मंत्रालय ने बताया कि संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने सांसदों के साथ विचार-विमर्श किया है। साथ ही यह भी बताया गया कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों में मानव वन्यजीव संघर्ष की प्रकृति अलग है। कहीं हाथियों का संघर्ष अधिक है तो कहीं बाघ, तेंदुए, भालू, गैंडा, जंगली सूअर, गौर और अन्य वन्यजीवों से जुड़े मामले सामने आते हैं। इसलिए हर क्षेत्र के लिए अलग रणनीति अपनाने की जरूरत है।

Centre of Excellence और राष्ट्रीय पोर्टल पर दिया गया ज़ोर

भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि कोयंबटूर स्थित SACON के WII South Centre में मानव वन्यजीव संघर्ष पर Centre of Excellence स्थापित किया गया है। यह संस्थान वैज्ञानिक शोध, नई तकनीक, नीति निर्माण, क्षमता विकास और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देगा।

इसके साथ ही 10 जुलाई 2026 को शुरू किए गए National Human-Wildlife Conflict Portal की भी जानकारी दी गई। यह पोर्टल मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं का रिकॉर्ड रखने, डेटा प्रबंधन, ज्ञान साझा करने और निर्णय लेने में सहायता करेगा। बैठक में दक्षिण भारत के लिए हाथी संरक्षण की Regional Action Plan को भी महत्वपूर्ण पहल बताया गया।

भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में मानव वन्यजीव संघर्ष पर हुई अहम बैठक, तकनीक और राज्यों के समन्वय से बनेगी नई रणनीति

6 राज्यों ने साझा किए अपने अनुभव

बैठक में असम, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश ने अपने-अपने राज्यों में मानव वन्यजीव संघर्ष की स्थिति और उससे निपटने के प्रयासों की जानकारी दी।

राज्यों ने बताया कि AI आधारित निगरानी, ड्रोन, जीआईएस, जीपीएस ट्रैकिंग, रैपिड रिस्पॉन्स टीम, अर्ली वार्निंग सिस्टम, वन्यजीव गलियारों की सुरक्षा, सामुदायिक स्वयंसेवकों की भागीदारी और समय पर मुआवजा जैसी व्यवस्थाएं बेहतर परिणाम दे रही हैं। साथ ही सभी राज्यों ने आपसी समन्वय और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार योजना बनाने पर ज़ोर दिया।

तकनीक और समुदाय दोनों होंगे समाधान का आधार

बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि मानव वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए केवल वन संरक्षण पर्याप्त नहीं है। इसके साथ मानव जीवन और आजीविका की सुरक्षा भी उतनी ही ज़रूरी है।

भूपेंद्र यादव ने कहा कि आधुनिक तकनीकों जैसे GIS, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, रेडियो टेलीमेट्री और प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स का अधिक उपयोग किया जाना चाहिए। इसके साथ वन विभाग के अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों को मज़बूत करना, मुआवजा प्रक्रिया को तेज करना, लोगों में जागरूकता बढ़ाना और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना भी ज़रूरी है।

भूपेंद्र यादव ने राज्यों के प्रयासों की सराहना की

बैठक के अंत में भूपेंद्र यादव ने राज्यों द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मानव वन्यजीव संघर्ष जैसी चुनौती का समाधान वैज्ञानिक प्रबंधन, संस्थागत समन्वय, तकनीक आधारित निगरानी और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से ही संभव है।

उन्होंने कहा कि National Human-Wildlife Conflict Portal और Centre of Excellence भविष्य में राज्यों को डेटा आधारित रणनीति बनाने, अनुभव साझा करने और बेहतर मॉडल अपनाने में मदद करेंगे। वहीं केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने सुझाव दिया कि प्रत्येक क्षेत्र की वहन क्षमता (Carrying Capacity) का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाना चाहिए, ताकि वन्यजीवों और उपलब्ध संसाधनों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए बेहतर योजना तैयार की जा सके।

भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में मानव वन्यजीव संघर्ष पर हुई अहम बैठक, तकनीक और राज्यों के समन्वय से बनेगी नई रणनीति

आगे की दिशा

बैठक के समापन पर सांसदों और विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर मानव वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए आवश्यक कदमों पर विस्तार से चर्चा की। भूपेंद्र यादव ने भरोसा जताया कि राज्यों के अनुभव, वैज्ञानिक तकनीकों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी के आधार पर ऐसी मज़बूत रणनीति तैयार की जाएगी, जिससे वन्यजीव संरक्षण और लोगों की सुरक्षा दोनों को समान महत्व मिल सके।

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