कपास की खेती करने वाले किसानों के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ी योजना शुरू करने का फैसला लिया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने “मिशन फॉर कॉटन प्रोडक्टिविटी” को मंज़ूरी दे दी है। इस मिशन पर सरकार अगले पांच वर्षों में ₹5659.22 करोड़ खर्च करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य देश में कपास उत्पादन बढ़ाना, किसानों की आय सुधारना और भारत को कपास के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है।
क्या है मिशन का उद्देश्य?
सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2031 तक देश में कपास उत्पादन को काफी बढ़ाया जाए। अभी जहां कपास की उत्पादकता 440 किलो प्रति हेक्टेयर है, उसे बढ़ाकर 755 किलो प्रति हेक्टेयर तक ले जाने की तैयारी है। मिशन के जरिए 498 लाख गांठ कपास उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
किसानों को कैसे होगा फ़ायदा?
इस योजना से करीब 32 लाख कपास किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। किसानों को नई और उन्नत खेती तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही उन्हें बेहतर बीज, आधुनिक खेती के तरीके और बाजार तक सीधी पहुंच भी मिलेगी।
सरकार किसानों को ऐसे बीज उपलब्ध कराएगी जो:
- ज्यादा उत्पादन देंगे
- मौसम के बदलाव को सहन कर सकेंगे
- कीट और बीमारियों से सुरक्षित होंगे
आधुनिक खेती तकनीकों पर जोर
मिशन के तहत हाई डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम (HDPS), क्लोजर स्पेसिंग और इंटीग्रेटेड कॉटन मैनेजमेंट जैसी आधुनिक तकनीकों को गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा। कृषि विज्ञान केंद्रों और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों की मदद से किसानों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
कपास की गुणवत्ता सुधारने की तैयारी
सरकार कपास की गुणवत्ता सुधारने पर भी विशेष ध्यान दे रही है। इसके लिए जिनिंग और प्रोसेसिंग फैक्ट्रियों को आधुनिक बनाया जाएगा। देशभर में आधुनिक कपास परीक्षण लैब स्थापित की जाएंगी ताकि भारतीय कपास की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर की बन सके।
“कस्तूरी कॉटन भारत” को मिलेगा बढ़ावा
सरकार “कस्तूरी कॉटन भारत” ब्रांड के जरिए भारतीय कपास को दुनिया भर में पहचान दिलाना चाहती है। इससे भारतीय कपास की मांग बढ़ेगी और किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी।

डिजिटल मंडियों से किसानों को लाभ
मिशन के तहत मंडियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इससे किसानों को:
- फसल का सही भाव पता चलेगा
- सीधे खरीदारों से जुड़ने का मौका मिलेगा
- बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी
प्राकृतिक रेशों को भी बढ़ावा
सरकार कपास के साथ-साथ बांस, केला, फ्लैक्स, रेमी और सिसल जैसे प्राकृतिक रेशों को भी बढ़ावा देगी। इससे पर्यावरण-अनुकूल टेक्सटाइल उद्योग को मजबूती मिलेगी।

14 राज्यों के 140 जिलों में शुरुआत
मिशन की शुरुआत पहले चरण में 14 राज्यों के 140 जिलों से की जाएगी। इसके अलावा 2000 जिनिंग और प्रोसेसिंग यूनिट्स को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा। “मिशन फॉर कॉटन प्रोडक्टिविटी” देश के कपास किसानों के लिए एक बड़ी पहल मानी जा रही है। अगर योजना सही तरीके से लागू हुई तो किसानों की आय बढ़ेगी, कपास उत्पादन मजबूत होगा और भारत वैश्विक टेक्सटाइल बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा।
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