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देश में मत्स्य पालन क्षेत्र को मज़बूत बनाने और मछुआरों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार लगातार कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसी दिशा में वित्त वर्ष 2020-21 से लागू प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) ने उल्लेखनीय परिणाम दिए हैं। इस योजना के माध्यम से मछली उत्पादन बढ़ाने, मत्स्य पालन से जुड़े लोगों को रोज़गार उपलब्ध कराने, निर्यात बढ़ाने और आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है।
पिछले छह वर्षों के दौरान केंद्र सरकार ने 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों सहित विभिन्न कार्यान्वयन एजेंसियों के लिए 21,461 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 9,571 करोड़ रुपये है, जबकि अब तक 6,205.78 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। ये जानकारी केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।
मछली उत्पादन में दर्ज हुई रिकॉर्ड बढ़ोतरी
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के प्रभाव से देश में मछली उत्पादन में लगातार वृद्धि हुई है। वर्ष 2019-20 में देश का मछली उत्पादन 141.64 लाख टन था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर रिकॉर्ड 197.75 लाख टन पहुंच गया। ये उपलब्धि बताती है कि आधुनिक तकनीक, सरकारी सहायता और बेहतर योजनाओं ने मछली उत्पादन को नई गति दी है।
इसके साथ ही मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से लगभग 58 लाख लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर भी सृजित हुए हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूती मिली है और मछली उत्पादन से जुड़े परिवारों की आय में भी सुधार देखने को मिला है।
निर्यात में भी हुआ बड़ा इज़ाफ़ा
केवल मछली उत्पादन ही नहीं, बल्कि मत्स्य निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2019-20 में जहां मत्स्य निर्यात 46,663 करोड़ रुपये था, वहीं वर्ष 2025-26 में ये बढ़कर 73,890 करोड़ रुपये पहुंच गया। इससे स्पष्ट है कि मछली उत्पादन के साथ-साथ भारतीय मत्स्य उत्पादों की वैश्विक मांग भी लगातार बढ़ रही है।
नीति आयोग ने भी प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का मूल्यांकन करते हुए इसके सकारात्मक प्रभाव को स्वीकार किया है और योजना को जारी रखने की सिफारिश की है। इसी आधार पर इस योजना को सितंबर 2026 तक वर्तमान स्वरूप में जारी रखा गया है। वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में इसके लिए 2,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
मछुआरों को मज़बूत बना रहे FFPO
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मछली उत्पादन बढ़ाने के साथ मछुआरों और मत्स्य किसानों को आर्थिक रूप से मज़बूत बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसके लिए Fish Farmers Producer Organizations (FFPOs) के गठन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच 544.86 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी देकर देशभर में 2,195 FFPO के गठन को स्वीकृति दी गई है। इन संगठनों को इन्क्यूबेशन लागत, प्रबंधन सहायता और इक्विटी ग्रांट जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं, जिससे मछली उत्पादन और विपणन दोनों को मज़बूती मिल रही है।
योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला सहारा
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना केवल मछली उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य मत्स्य पालन को लाभकारी व्यवसाय बनाना, रोज़गार के नए अवसर तैयार करना और मछुआरों की आय में स्थायी वृद्धि करना भी है।
राज्यों में आधुनिक मत्स्य अवसंरचना, एक्वाकल्चर, मूल्य संवर्धन और विपणन सुविधाओं के विकास के लिए लगातार निवेश किया जा रहा है। इससे मछली उत्पादन की गुणवत्ता और उत्पादकता दोनों में सुधार हो रहा है।
राज्यों में स्वीकृत परियोजनाओं का विवरण
नीचे प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत पिछले छह वर्षों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए स्वीकृत परियोजनाओं, केंद्रीय हिस्सेदारी और जारी धनराशि का विवरण दिया गया है।
| क्र.सं. | राज्य/केंद्र शासित प्रदेश | परियोजना लागत (₹ करोड़) | केंद्रीय हिस्सेदारी (₹ करोड़) | जारी केंद्रीय निधि (₹ करोड़) | केंद्रीय देयता (₹ करोड़) |
| 1 | Andaman and Nicobar Islands | 269.84 | 245.33 | 17.09 | 228.24 |
| 2 | Andhra Pradesh | 2,328.89 | 681.38 | 444.95 | 236.43 |
| 3 | Arunachal Pradesh | 230.31 | 159.18 | 127.09 | 32.19 |
| 4 | Assam | 541.63 | 298.44 | 218.51 | 81.37 |
| 5 | Bihar | 579.62 | 193.12 | 121.93 | 71.19 |
| 6 | Chhattisgarh | 956.86 | 321.01 | 272.37 | 48.64 |
| 7 | Delhi | 5.33 | 2.86 | 1.63 | 1.23 |
| 8 | Goa | 147.24 | 72.19 | 53.05 | 24.15 |
| 9 | Gujarat | 910.75 | 346.74 | 173.35 | 173.39 |
| 10 | Haryana | 760.87 | 262.16 | 162.75 | 99.42 |
| 11 | Himachal Pradesh | 156.03 | 79.93 | 78.91 | 1.03 |
| 12 | Jammu and Kashmir | 154.57 | 81.43 | 79.61 | 1.82 |
| 13 | Jharkhand | 472.63 | 166.58 | 118.50 | 50.19 |
| 14 | Karnataka | 1,053.60 | 380.32 | 328.29 | 52.03 |
| 15 | Kerala | 1,329.63 | 570.49 | 432.22 | 138.26 |
| 16 | Ladakh | 33.49 | 20.10 | 12.17 | 7.93 |
| 17 | Lakshadweep | 62.45 | 44.22 | 14.42 | 29.80 |
| 18 | Madhya Pradesh | 910.81 | 305.51 | 292.27 | 13.23 |
| 19 | Maharashtra | 1,601.44 | 593.33 | 392.11 | 201.22 |
| 20 | Manipur | 201.82 | 95.84 | 29.92 | 65.94 |
| 21 | Meghalaya | 132.62 | 74.26 | 65.44 | 11.35 |
| 22 | Mizoram | 154.17 | 85.61 | 83.52 | 2.73 |
| 23 | Nagaland | 168.33 | 109.56 | 89.17 | 20.39 |
| 24 | Odisha | 1,301.19 | 484.66 | 361.35 | 123.29 |
| 25 | Puducherry | 351.26 | 296.44 | 92.40 | 204.04 |
| 26 | Punjab | 162.23 | 46.96 | 29.46 | 17.58 |
| 27 | Rajasthan | 70.38 | 24.53 | 8.90 | 15.63 |
| 28 | Sikkim | 83.68 | 51.70 | 43.98 | 7.68 |
| 29 | Tamil Nadu | 1,236.21 | 474.99 | 223.02 | 253.12 |
| 30 | Telangana | 353.02 | 112.69 | 41.19 | 71.50 |
| 31 | Dadra and Nagar Haveli and Daman and Diu | 6.31 | 3.58 | 1.79 | 1.79 |
| 32 | Tripura | 262.93 | 150.60 | 91.45 | 59.14 |
| 33 | Uttar Pradesh | 1,294.32 | 412.30 | 336.61 | 75.69 |
| 34 | Uttarakhand | 317.25 | 170.20 | 166.68 | 3.53 |
| 35 | West Bengal | 546.38 | 223.19 | 87.04 | 136.21 |
| A | Total (CSS) | 19,148.11 | 7,641.42 | 5,093.16 | 2,561.36 |
| B | Central Sector Scheme Component of PMMSY | 2,312.92 | 1,929.68 | 1,112.62 | 817.06 |
| A+B | Total (CSS + CS) | 21,461.03 | 9,571.09 | 6,205.78 | 3,378.42 |
आगे की दिशा
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ने मछली उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बढ़ता मछली उत्पादन, रोज़गार के नए अवसर, निर्यात में वृद्धि और FFPO जैसे संस्थागत प्रयास इस क्षेत्र को और मज़बूत बना रहे हैं। आने वाले वर्षों में भी इस योजना के माध्यम से मछली उत्पादन को बढ़ावा देने और मत्स्य किसानों की आय में वृद्धि की दिशा में प्रयास जारी रहने की उम्मीद है।
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