Global Conference of Women Farmers GCWAS-2026 : अब महिला किसानों के नाम होगा 2026 का हर दिन

भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम हॉल में आयोजित Three-day global conference 'Global Conference on Women in Agri-Food Systems 2026'  ( GCWAS-2026) सिर्फ एक आयोजन नहीं है, बल्कि ये उस अरबों डॉलर के अदृश्य (invisible) योगदान को सलाम करने का मंच था, जो महिलाएं दुनिया की थालियों को भरने के लिए देती हैं। इस सम्मेलन की शुरूआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) ने की।

आमतौर पर कृषि सम्मेलनों में खाद, बीज और सिंचाई पर बात होती है, लेकिन मार्च 2026 में दिल्ली के ICAR परिसर में कुछ अलग ही मंजर देखने को मिला। यहां चर्चा का केंद्र बिंदु थीं वो ताकत, जो खेतों में हल चलाने से लेकर अनाज को बाज़ार तक पहुंचाने तक, हर मोर्चे पर डटी हैं, ‘महिला किसान’ (Women farmers)।

भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम हॉल में आयोजित Three-day global conference ‘Global Conference on Women in Agri-Food Systems 2026’  ( GCWAS-2026) सिर्फ एक आयोजन नहीं है, बल्कि ये उस अरबों डॉलर के अदृश्य (invisible) योगदान को सलाम करने का मंच था, जो महिलाएं दुनिया की थालियों को भरने के लिए देती हैं। इस सम्मेलन की शुरूआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) ने की।

इस दौरान राष्ट्रपति ने ‘Women and Agriculture: Shaping the Future Together’ नामक पुस्तक का लोकार्पण किया, जिसमें महिला किसानों की सफलता की प्रेरक कहानियां हैं।

महिला किसानों का संघर्ष

देश के कृषि आंकड़े बताते हैं कि खेती में 70 से 80 प्रतिशत काम महिलाओं का है। लेकिन जब ज़मीन के कागजों की बात आती है या फिर किसान सम्मान निधि की, तो तस्वीर बदल जाती है। इसी कमी को दूर करने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) ने इस सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए एक बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ‘बीज से लेकर बाज़ार तक’ (From seed to market) हर Step में महिला की उपस्थिति के बिना कृषि अधूरी है।

राष्ट्रपति ने उन वीरांगनाओं का ख़ासतौर से ज़िक्र किया, जिन्होंने अपने अथक परिश्रम से मिसाल कायम की। तमिलनाडु की रंगमल अप्पामाल, महाराष्ट्र की राहीबाई सोमा पोप्रे (सीड मदर), बिहार की राजकुमारी देवी और ओडिशा की सावित्री कुंभार – ये वो नाम हैं जिन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

2026: महिला किसानों के नाम

इस सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि इसने वैश्विक स्तर पर महिला किसानों की पहचान को मुखर किया। राष्ट्रपति मुर्मू ने घोषणा की कि संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2026 को ‘महिला किसान का अंतरराष्ट्रीय वर्ष’ (2026 is the ‘International Year of Women Farmers’) घोषित किया है।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Union Agriculture Minister Shivraj Singh Chouhan) ने कहा कि जिस देश में धरती को मां का दर्जा हो, वहां महिला किसानों का सम्मान स्वाभाविक है। उन्होंने सरकार की योजनाओं का ब्योरा दिया, जन धन योजना के 56 फीसदी खाते महिलाओं के हैं, मुद्रा योजना के 68 फीसदी लाभार्थी महिलाएं हैं। ड्रोन दीदी योजना हो या राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, हर जगह महिलाएं आगे बढ़ रही हैं।

भविष्य की कृषि का आधार

देश के कृषि विश्वविद्यालयों में आज 50 फीसदी से ज़्यादा छात्राएं हैं। ये बदलाव का संकेत है। जब ये शिक्षित युवतियां खेतों में उतरेंगी, तो कृषि सिर्फ एक धंधा नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक और लाभकारी उद्योग बन जाएगी।

 

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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