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इस साल देशभर में अंडे और चिकन की कीमतों ने आम आदमी की जेब पर भारी असर डाला है। जो प्रोटीन का सबसे सस्ता सोर्स माना जाता था, वो अब महंगा हो गया है। देश के कई बड़े शहरों में एक अंडा 8.50 से 9 रुपये तक पहुंच गया है। चिकन के दाम भी आसमान छू रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस महंगाई की असली वजह सिर्फ गर्मी या बारिश नहीं, बल्कि मुर्गियों का खाना (पोल्ट्री फीड) है?
मक्का-सोयाबीन से अंडे तक
पोल्ट्री फीड में 55-60 फीसदी मक्का होता है, जो मुर्गियों को एनर्जी देता है। वहीं, सोयाबीन मील प्रोटीन का मेन सोर्स है। जब ये दोनों महंगे होते हैं, तो फीड की लागत बढ़ जाती है। इस साल पोल्ट्री फीड की कीमत 3,600 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 4,400 रुपये पहुंच गई। यानी करीब 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी। वहीं, सोयाबीन मील का भाव 62,000–65,000 रुपये प्रति टन पर अटका है।
जब फीड महंगी होती है, तो किसान या तो उत्पादन घटाते हैं या कीमतें बढ़ाते हैं। दोनों हालत में उपभोक्ता को भुगतना पड़ता है।
इथेनॉल ने बढ़ाई मक्के की मुश्किल
मक्का सिर्फ पोल्ट्री फीड के लिए नहीं, बल्कि इथेनॉल बनाने वाली कंपनियां भी इसे ख़रीद रही हैं। इससे बाज़ार में मक्के की किल्लत हो गई है। इंडस्ट्री का अनुमान है कि नई फसल आने से पहले 15 लाख टन मक्के की कमी हो सकती है। यानी आने वाले दिनों में फीड और महंगी हो सकती है, और अंडे-चिकन और भी महंगे हो सकते हैं।
सोयाबीन संकट- कम पैदावार और बारिश की मार
सोयाबीन मील की सप्लाई भी चिंता का विषय है। कम उत्पादन और अनिश्चित बारिश ने इसकी उपलब्धता को घटा दिया है। जून में ऑल इंडिया पोल्ट्री ब्रीडर्स एसोसिएशन ने कहा कि इंडस्ट्री 25 फीसदी तक प्रोडक्शन कटौती की योजना बना रही है। इसका मतलब कम अंडे और चिकन, और ऊंची कीमतें।
मौसम के काम बिगाड़ा
इस बार लंबी गर्मी और अनियमित बारिश ने मुर्गियों की सेहत पर भी असर डाला। गर्मी से मुर्गियां कम खाना खाती हैं, जिससे उनका वज़न और अंडा उत्पादन दोनों घट जाते हैं। इसका असर सीधे बाजार पर पड़ा। जुलाई में अकेले हैदराबाद में अंडे के दाम महीनेभर में 15 फीसदी और सालभर में 40 फीसदी तक बढ़ गए।
भारत में कितना होता है अंडा उत्पादन?
पशुपालन विभाग के अनुसार, 2024-25 में भारत में 149.11 अरब अंडे प्रोड्यूस हुए, जिसमें 84.49 फीसदी कमर्शियल पोल्ट्री फार्मों से आते हैं। जब इतना बड़ा सेक्टर प्रभावित होता है, तो उसका असर पूरे फूड मार्केट पर पड़ता है।
कब तक रहेगी महंगाई?
जब तक मक्का-सोयाबीन की कीमतें कंट्रोल नहीं होतीं और मौसम सामान्य नहीं होता, तब तक अंडे-चिकन के दामों में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। यह महंगाई हमें एक बड़ा सबक देती है। कि हमारे प्लेट का प्रोटीन, खेतों के मक्का-सोयाबीन से जुड़ा है। जब तक किसानों की लागत नहीं घटेगी, तब तक आम आदमी की थाली महंगी रहेगी।
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