Table of Contents
भारत और अफगानिस्तान के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग को और मज़बूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अफगानिस्तान के कृषि, सिंचाई एवं पशुपालन मंत्री मौलवी अताउल्लाह ओमारी और उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ द्विपक्षीय बैठक की। बैठक में कृषि, सिंचाई, पशुपालन, कृषि अनुसंधान, शिक्षा, क्षमता निर्माण और कृषि व्यापार जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि दोनों देशों के बीच सदियों पुराने विश्वास, मित्रता और जनसंपर्क के रिश्ते हैं, जिन्हें कृषि सहयोग के माध्यम से और मज़बूत बनाया जाएगा।
भारत ने कृषि सहयोग बढ़ाने की जताई प्रतिबद्धता
बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने अफगान प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि भारत हमेशा से अफगानिस्तान के कृषि विकास में सहयोग के लिए तैयार रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अपने वैज्ञानिक अनुभव, आधुनिक तकनीक और कृषि संस्थानों की विशेषज्ञता साझा कर अफगानिस्तान में खाद्य सुरक्षा, कृषि उत्पादकता और किसानों की समृद्धि बढ़ाने में सहयोग करेगा।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोनों देशों के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
गुणवत्तापूर्ण बीज और उत्पादन बढ़ाने पर हुई चर्चा
बैठक में खाद्य सुरक्षा, बीज प्रणाली और फ़सल उत्पादन प्रमुख विषय रहे। अफगानिस्तान की ओर से गेहूं उत्पादन बढ़ाने के लिए बेहतर बीज और अनुसंधान सहयोग की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया।
इस पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत अफगानिस्तान को उच्च गुणवत्ता वाले गेहूं, मक्का और आलू के बीज उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। इसके साथ ही जलवायु अनुकूल और पोषक तत्वों से भरपूर फ़सल किस्मों के विकास तथा ICAR के वैज्ञानिक सहयोग के माध्यम से बीज प्रणाली को मज़बूत करने में भी सहायता दी जाएगी।
जल संरक्षण और सिंचाई पर साझा रणनीति
बैठक के दौरान जल प्रबंधन और जलवायु अनुकूल खेती पर भी विस्तार से चर्चा हुई। अफगानिस्तान ने जल संकट और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए सिंचाई और जल संरक्षण के क्षेत्र में सहयोग की इच्छा जताई।
शिवराज सिंह चौहान ने भारत के माइक्रो इरिगेशन, वर्षा जल संचयन, फार्म पॉन्ड, चेक डैम और पानी के बेहतर उपयोग से जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि भारत टिकाऊ सिंचाई व्यवस्था और जलवायु अनुकूल कृषि प्रणाली विकसित करने में अफगानिस्तान का पूरा सहयोग करेगा।
अनुसंधान और कृषि शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा
शिवराज सिंह चौहान ने दोनों देशों के कृषि संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने का भी प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि ICAR और अफगानिस्तान के कृषि संस्थानों के बीच संयुक्त अनुसंधान, फैकल्टी और छात्र आदान-प्रदान, प्रयोगशाला सहयोग तथा वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों के प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जा सकते हैं।
बैठक में बागवानी, डेयरी, पशुपालन, पोल्ट्री, मत्स्य पालन, पशु स्वास्थ्य, डिजिटल कृषि, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और फ़सल कटाई के बाद की तकनीकों पर सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
कृषि व्यापार और वैल्यू चेन पर भी बनी सहमति
बैठक में दोनों देशों ने कृषि व्यापार बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विचार किया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि उत्पादों, गुणवत्तापूर्ण बीजों और वैल्यू एडेड उत्पादों के व्यापार को बढ़ावा देने से दोनों देशों के किसानों और कृषि उद्यमों को लाभ मिलेगा।
अफगानिस्तान ने कृषि वैल्यू चेन को मज़बूत करने, तकनीक हस्तांतरण, एग्री बिजनेस और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने में भी भारत से सहयोग की अपेक्षा जताई।
ICAR निभाएगा महत्वपूर्ण भूमिका
बैठक के दौरान ICAR के अधिकारियों ने दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहे कृषि सहयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गेहूं अनुसंधान, सिंचाई, जर्मप्लाज्म आदान-प्रदान, वाटरशेड प्रबंधन और मानव संसाधन विकास जैसे क्षेत्रों में पहले से सहयोग जारी है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ICAR भविष्य में भी गेहूं अनुसंधान, बागवानी, डेयरी, पशुपालन, मत्स्य पालन और कृषि तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग को और मज़बूत करेगा।
संयुक्त कार्य समूह बनाने पर बनी सहमति
बैठक के दौरान दोनों देशों ने कृषि और पशुपालन क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग के लिए संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group) बनाने पर सहमति व्यक्त की। यह समूह भविष्य के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार करेगा और दोनों देशों के बीच संस्थागत सहयोग को मज़बूत करेगा।
बैठक के अंत में शिवराज सिंह चौहान ने विश्वास जताया कि यह संवाद भारत और अफगानिस्तान की पुरानी मित्रता को और मज़बूत करेगा। उन्होंने कहा कि अनुसंधान, नवाचार, तकनीक हस्तांतरण और क्षमता निर्माण के माध्यम से दोनों देश टिकाऊ कृषि, खाद्य सुरक्षा और किसानों की समृद्धि के लिए मिलकर काम करेंगे।
ये भी पढ़ें : El Niño को लेकर सरकार सतर्क, बारिश की कमी घटी, ख़रीफ़ फ़सलों के लिए तैयार हुई नई रणनीति
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुंचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

