Start-up Village Entrepreneurship Programme से बदल रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था, लाखों लोगों को मिला स्वरोज़गार का नया अवसर

Start-up Village Entrepreneurship Programme के ज़रिए 4.32 लाख से अधिक ग्रामीण उद्यमों को बढ़ावा मिला, जिससे रोज़गार और आय में वृद्धि हो रही है।

भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम दुनिया में तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन लंबे समय तक इसका अधिकतर विकास शहरों तक ही सीमित रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में भी उद्यमिता को बढ़ावा देने और लोगों को स्वरोज़गार से जोड़ने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने Start-up Village Entrepreneurship Programme की शुरुआत की। ये कार्यक्रम गांवों में गैर-कृषि आधारित छोटे उद्यमों को बढ़ावा देकर रोज़गार, आय और आर्थिक विकास को मज़बूत बनाने का काम कर रहा है।

वर्ष 2016 में शुरू किए गए Start-up Village Entrepreneurship Programme के तहत 30 जून 2026 तक देशभर में 4.32 लाख से अधिक ग्रामीण उद्यमों को सहायता दी जा चुकी है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य गांवों में उद्यमिता को बढ़ावा देना, गरीबी कम करना और स्थानीय स्तर पर रोज़गार के नए अवसर तैयार करना है।

क्या है Start-up Village Entrepreneurship Programme?

Start-up Village Entrepreneurship Programme दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) की एक उप-योजना है। इसका उद्देश्य स्वयं सहायता समूह (SHG) के सदस्यों और उनके परिवारों को गैर-कृषि क्षेत्र में छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

इस योजना के तहत लाभार्थियों को वित्तीय सहायता, व्यवसाय प्रबंधन का प्रशिक्षण, सॉफ्ट स्किल डेवलपमेंट, मेंटरिंग और बिजनेस डेवलपमेंट सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। साथ ही बैंकों से ऋण, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना जैसी अन्य सरकारी योजनाओं से जोड़ने और सामुदायिक संस्थाओं के माध्यम से लगातार सहयोग भी दिया जाता है।

Start-up Village Entrepreneurship Programme से बदल रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था, लाखों लोगों को मिला स्वरोज़गार का नया अवसर

ग्रामीण उद्यमिता को मिला नया विस्तार

Start-up Village Entrepreneurship Programme ने ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए समावेशी मॉडल अपनाया है। कार्यक्रम में महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदायों को विशेष प्राथमिकता दी गई है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कार्यक्रम के तहत जुड़े लगभग 86 प्रतिशत उद्यमी SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक समुदायों से हैं। असम, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश उन राज्यों में शामिल हैं जहां सबसे अधिक ग्रामीण उद्यम स्थापित किए गए हैं।

DAY-NRLM से मिला मज़बूत आधार

Start-up Village Entrepreneurship Programme की सफलता में DAY-NRLM की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ये दुनिया की सबसे बड़ी ग्रामीण आजीविका योजनाओं में से एक है, जिसके तहत ग्रामीण गरीब परिवारों, विशेष रूप से महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जाता है।

जून 2026 तक DAY-NRLM के तहत 10.29 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवार SHG से जुड़ चुके हैं। येी मज़बूत नेटवर्क Start-up Village Entrepreneurship Programme को गांव-गांव तक पहुंचाने में मदद कर रहा है।

स्वयं सहायता समूह से सफल उद्यमी बनने तक का सफर

महाराष्ट्र के जहानपुर की रहने वाली भाग्यश्री लोंढे की कहानी इस योजना की सफलता का उदाहरण है। उन्होंने वर्ष 2014 में स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपनी यात्रा शुरू की। शुरुआत में उन्होंने मसाले, पापड़ और अचार का छोटा व्यवसाय शुरू किया।

बाद में Start-up Village Entrepreneurship Programme के तहत सामुदायिक उद्यम निधि (CEF) से 45 हजार रुपये का ऋण मिला, जिससे उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार किया। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कच्चे माल का उपयोग करते हुए उन्होंने उत्पादन बढ़ाया। महालक्ष्मी सरस 2019-20 मेले में उन्होंने केवल 10 दिनों में लगभग 5 लाख रुपये की बिक्री की।

इसके साथ उन्होंने ओपन यूनिवर्सिटी से दसवीं की पढ़ाई पूरी की और NRLM तथा कृषि विज्ञान केंद्र के प्रशिक्षण से अपने व्यवसायिक और तकनीकी कौशल को भी मज़बूत किया। आज उनका उद्यम ग्रामीण महिलाओं को रोज़गार देने के साथ नियमित आय का भी स्रोत बन चुका है।

Start-up Village Entrepreneurship Programme से बदल रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था, लाखों लोगों को मिला स्वरोज़गार का नया अवसर

सरकार लगातार बढ़ा रही है निवेश

ग्रामीण उद्यमों के विस्तार को गति देने के लिए सरकार लगातार वित्तीय सहायता बढ़ा रही है। फरवरी 2026 तक Start-up Village Entrepreneurship Programme के लिए केंद्र सरकार की कुल हिस्सेदारी 942.09 करोड़ रुपये जारी की जा चुकी है।

ये राशि कार्यक्रम की शुरुआत से जनवरी 2018 तक जारी 112.39 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 738 प्रतिशत अधिक है। इससे स्पष्ट है कि सरकार ग्रामीण उद्यमिता को मज़बूत बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है।

गांव स्तर पर कैसे काम करता है ये कार्यक्रम?

Start-up Village Entrepreneurship Programme का संचालन राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM) के माध्यम से किया जाता है। प्रत्येक ब्लॉक में ब्लॉक रिसोर्स सेंटर एंटरप्राइज प्रमोशन (BRC-EP) इसकी गतिविधियों का संचालन करता है।

प्रशिक्षित कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन एंटरप्राइज प्रमोशन (CRP-EP) संभावित उद्यमियों को व्यवसाय शुरू करने, प्रशिक्षण, बैंक ऋण, बाज़ार से जुड़ाव और लगातार मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। प्रत्येक CRP-EP लगभग 50 उद्यमों को तकनीकी और व्यवसायिक सहायता देता है।

इस कार्यक्रम में कम से कम 60 प्रतिशत लाभार्थी महिलाओं को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही दिव्यांग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक समुदायों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाती है।

पूनम की कहानी बनी प्रेरणा

उत्तर प्रदेश की पूनम ने सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद Start-up Village Entrepreneurship Programme के माध्यम से नई पहचान बनाई। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने 54 दिनों का CRP-EP प्रशिक्षण पूरा किया।

आज वह लगभग 40 ग्रामीण उद्यमों को बिजनेस प्लान तैयार करने, बैंक ऋण दिलाने, बाज़ार से जोड़ने और नियमित मार्गदर्शन देने का काम कर रही हैं। पूनम का मानना है कि इस कार्यक्रम ने उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया और दूसरों की मदद करने का अवसर भी दिया।

कार्यक्रम का असर गांवों में साफ दिखाई दे रहा है

क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (QCI) द्वारा किए गए मूल्यांकन में Start-up Village Entrepreneurship Programme के सकारात्मक परिणाम सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार 99 प्रतिशत समर्थित उद्यम लाभ में चल रहे हैं। इन उद्यमों से परिवारों की कुल आय का लगभग 57 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त हो रहा है।

औसतन एक उद्यम की मासिक आय करीब 39 हजार रुपये रही, जबकि मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के उद्यमों की औसत मासिक आय लगभग 47,800 रुपये दर्ज की गई। इसके अलावा 96 प्रतिशत उद्यमियों ने अपनी बचत बढ़ने की जानकारी दी और 75 प्रतिशत उद्यम महिलाओं के स्वामित्व या प्रबंधन में पाए गए।

ग्रामीण विकास की नई पहचान

Start-up Village Entrepreneurship Programme ने ये साबित किया है कि सही प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और सामुदायिक सहयोग मिलने पर गांवों में भी सफल उद्यम विकसित किए जा सकते हैं। इस पहल ने महिलाओं, पहली पीढ़ी के उद्यमियों और वंचित वर्गों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है।

ग्रामीण रोज़गार बढ़ाने, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने और लाखों परिवारों की आय में सुधार लाने में Start-up Village Entrepreneurship Programme महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आने वाले समय में ये कार्यक्रम आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में भी एक मज़बूत आधार बन सकता है।

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