Thursday, 1 October 2026
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Water Levels Of Reservoirs: अलर्ट! देश के बड़े जलाशय सूखने की कगार पर, 80 फीसदी से नीचे पहुंचा जलस्तर

देश के 166 बड़े जलाशयों का जलस्तर (Water levels of reservoirs) 80 फीसदी से नीचे लुढ़क गया है। केंद्रीय जल आयोग (Central Water Commission) के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि देश के ज़्यादातर इलाकों में बारिश नहीं होने से जल भंडार (Water reservoir) घट रहा है। हालांकि, पिछले साल की तुलना में अभी भी जल भंडार ज़्यादा है, लेकिन आने वाले महीनों में स्थिति चिंताजनक हो सकती है।

कितना पानी बचा है?

केंद्रीय जल आयोग के वीकली बुलेटिन के मुताबिक, इन 166 जलाशयों (reservoirs) में कुल 142.177 अरब घन मीटर (बीसीएम) पानी मौजूद है। ये इनकी कुल क्षमता 183.565 बीसीएम का लगभग 77.45 फीसदी ही है। ये स्तर पिछले साल इसी समय से 5.5 प्रतिशत ज़्यादा है और पिछले 10 साल के औसत से 22.5 फीसदी ज़्यादा है। लेकिन, ये गिरावट का रुझान ख़तरे की घंटी है।

देशभर का क्या हाल है?

  • Northern Region: 11 जलाशय, क्षमता का केवल 71.95% भरा।
  • Eastern region: 27 जलाशय, क्षमता का लगभग 69.52% भरा।
  • Western Region: 53 जलाशय, स्थिति बेहतर, क्षमता का 86.7% भरा।
  • Central Region: 28 जलाशय, क्षमता का 80.39% भरा।
  • Southern region: 47 जलाशय, क्षमता का 73.57% भरा।

साफ है कि पश्चिमी और मध्य भारत के जलाशयों को छोड़कर बाकी सभी जगह जल संकट के आसार नज़र आ रहे हैं।

Water Levels Of Reservoirs: अलर्ट! देश के बड़े जलाशय सूखने की कगार पर, 80 फीसदी से नीचे पहुंचा जलस्तर

बारिश ने मारी चुप्पी 

इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह है बारिश का न होना। India Meteorological Department (आईएमडी) के अनुसार, पिछले हफ्ते सिर्फ दक्षिणी प्रायद्वीप और उत्तर-पश्चिम (Southern Peninsula and Northwest) के कुछ हिस्सों में ही बारिश हुई। बाकी पूरे देश में मौसम शुष्क रहा। ये सर्दियों में होने वाली उत्तर-पूर्वी मानसून की बारिश (Northeast monsoon rains) की कमी को दिखाता है, जो दक्षिणी भारत के लिए जल का प्रमुख स्रोत होती है।

क्या आगे और गिरेगा स्तर?

IMD का पूर्वानुमान है कि जनवरी से मार्च के दौरान देश में सामान्य से कम बारिश होगी। इसका सीधा मतलब है कि जलाशयों में पानी की फिर से सप्लाई नहीं होगी और इस्तेमाल के कारण उनका जलस्तर और गिरेगा। फिलहाल, सिर्फ 8 जलाशय ठप्प भरे हैं, जबकि 42 जलाशय 90 फीसदी से अधिक भरे हैं। वहीं, 13 जलाशय ऐसे हैं जहां भंडारण 40 फीसदी से भी कम है और यह चिंता का सबसे बड़ा कारण है।

 क्यों है ये ख़तरनाक?

ये सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, ये भविष्य के संकट की ओर इशारा है। जलाशय सिर्फ पीने के पानी के स्रोत नहीं हैं, बल्कि खरीफ फसलों की सिंचाई, पनबिजली उत्पादन और उद्योगों की जरूरतें भी इन्हीं पर टिकी होती हैं। अगर गर्मियों से पहले ही जलस्तर तेजी से गिरने लगे, तो:

1.गर्मी में पेयजल संकट गहरा सकता है।

2.रबी की फसल की सिंचाई प्रभावित हो सकती है।

3.बिजली कटौती की स्थिति पैदा हो सकती है।

4.कृषि और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।

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Asma

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