उत्तर प्रदेश के पीलीभीत ज़िले में बासमती चावल की किस्मत बदलने वाली एक पहल की शुरुआत हो रही है। यहां अमरिया क्षेत्र के टांडा बिजैसी में करीब सात एकड़ भूमि पर ‘Basmati and Organic Training Centre-cum-Demonstration Farm’ (बासमती-जैविक प्रशिक्षण केंद्र) डेवलप किया जाएगा। इस सेंटर का उद्घाटन केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद और कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही करेंगे। ये सेंटर देश का पहला ऐसा केंद्र होगा, जहां पारंपरिक और जैविक दोनों तरह की बासमती खेती की ट्रेनिंग और लाइव डेवो दिया जाएगा।
AI से होगा सर्वे, मिलेगी सटीक जानकारी
इस पहल की रीढ़ होगी भारत की पहली AI-based Basmati paddy survey project 2026-28। एपीडा और अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ के सहयोग से करीब 40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का सर्वे किया जाएगा।
- 1.50 लाख से ज़्यादा ज़मीनी सर्वे प्वाइंट
- 5 लाख से ज़्यादा किसान जुड़ेंगे
- फसल का सटीक आकलन, बासमती की किस्मों की पहचान, वैज्ञानिक परामर्श और एक्सपोर्ट योजना सब AI के दम पर होगी
यानी, अब किसान को अंदाज़ा नहीं, पक्का आंकड़ा मिलेगा कि किस किस्म की बासमती कितनी फायदेमंद है।
किसान, छात्र, वैज्ञानिक-सबको मिलेगा फायदा
ये सेंटर सिर्फ किसानों के लिए नहीं, बल्कि कृषि एक्सपर्ट्स और स्टूडेंट्स के लिए भी रिसोर्स सेंटर होगा। उत्तराखंड के किसान भी इसका फायदा उठा सकेंगे। खास बात है कि यहां फुल क्वालिटी बासमती बीज और जैविक खेती से संबधित प्रोडक्ट्स के लिए स्पोशल आउटलेट भी बनाए जाएंगे।
पीलीभीत बनेगा राष्ट्रीय शोध केंद्र
इस केंद्र को नेशनल लेवल के बासमती चावल परीक्षण के लिए AICRP (अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना) केंद्र नामित किया गया है। ये नगीना और मोदीपुरम के बाद उत्तर प्रदेश का तीसरा AICRP केंद्र होगा।
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