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कर्नाटक (Karnataka) जहां तकनीक और आर्थिक विकास के मामले में देश का अग्रणी राज्य है, वहीं राज्य के बड़े सूखे क्षेत्रों में खेती और कृषि उत्पादन को लेकर चुनौतियां भी कम नहीं हैं। नीति आयोग (NITI Aayog) ने इन इलाकों में कृषि बढ़ाने के लिए ख़ास रणनीति बनाने की सलाह दी है, जिससे कम बारिश वाले क्षेत्रों में भी किसानों की आमदनी बढ़ सके।
क्यों ज़रूरी है सूखे क्षेत्रों के लिए अलग रणनीति?
कर्नाटक की करीब 70 फीसदी आबादी कृषि पर डिपेंड है, लेकिन राज्य के कई जिलों में बारिश कम होती है। ऐसे में पारंपरिक खेती से किसानों को बेहतर उपज नहीं मिल पाती। नीति आयोग ने सुझाव दिया कि ड्राईलैंड में क्रॉप डाइवर्सिफिकेशन, कम पानी वाली फसलें, ड्रिप सिंचाई और मॉडर्न टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर फोकस देना चाहिए। इसके अलावा मिट्टी की नमी बचाने वाली तकनीकों को बढ़ावा देने की भी सलाह दी गई।
उपमुख्यमंत्री ने उठाए कई मुद्दे
उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (Deputy Chief Minister DK Shivakumar) ने नीति आयोग (NITI Aayog) से राज्य को केंद्रीय फंड में उचित हिस्सा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि देश का विकास तभी संभव है जब राज्यों का तेजी से विकास हो। उन्होंने बेंगलुरू (Bengaluru) पर बढ़ती आबादी और इंफ्रास्ट्रक्चर के दबाव को लेकर भी चिंता जताई। नीति आयोग ने कर्नाटक में ‘दूसरा बेंगलुरु’ विकसित करने की एडवाइज़ दी है। जिस पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी।
कर्नाटक की ताकत और चुनौतियां
1.GDP: 2025-26 में कर्नाटक की जीएसडीपी 32.81 लाख करोड़ रुपये
2.विकास दर: 8.1 फीसदी
3.सेवा क्षेत्र का योगदान: 70 फीसदी
4.कृषि का योगदान: सिर्फ 11 फीसदी
राज्य हर साल 50 हजार करोड़ रुपये पांच गारंटी योजनाओं पर खर्च कर रहा है। किसानों को बिजली सब्सिडी पर 20 हजार करोड़ रुपये खर्च होते हैं।
आबादी के आधार पर फंड बंटवारे पर आपत्ति
शिवकुमार ने सेंट्रल फंड के बंटवारे में आबादी को आधार बनाए जाने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जिन दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में अच्छा काम किया, उन्हें नुकसान नहीं होना चाहिए।
क्या है नीति आयोग की सलाह?
नीति आयोग ने माना कि कर्नाटक में तेजी से विकास की संभावनाएं हैं। उन्होंने राज्य के सूखे इलाकों में कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए ख़ास रणनीति बनाने पर जोर दिया, जिससे कम बारिश वाले क्षेत्रों में खेती मजबूत हो और किसानों की आमदनी बढ़े। नीति आयोग ने कर्नाटक में ‘दूसरा बेंगलुरु’ विकसित करने की एडवाइज़ दी है।
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