Table of Contents
एक ओर जहां देश के सीमावर्ती इलाकों में तैनात जवानों को ताज़ा दूध मिलता है, वहीं दूसरी ओर दूरदराज़ के इलाकों में रहने वाले डेयरी किसानों को अपनी उपज का सही दाम मिलता है। यह संभव हुआ है डेयरी सहकारिता और रक्षा क्षेत्र की चार दशक पुरानी मजबूत पार्टनरशिप के ज़रिए।
National Cooperative Dairy Federation of India (NCDFI) और इंडियन आर्मी के बीच यह अनोखी साझेदारी 40 साल पूरी कर चुकी है। गुजरात के आनंद में आयोजित ‘डेयरी-रक्षा साझेदारी पर सहकारी सम्मेलन’ (NCDFI Conclave) में दोनों संगठनों ने इस सहयोग को और मज़बूत करने का संकल्प (Resolution) लिया।
क्या है यह पार्टनरशिप ?
1984 में शुरू हुई यह पार्टनरशिप आज 117 डेयरी सहकारी समितियों तक फैल चुकी है। 2025-26 में इसका कॉन्ट्रैक्ट प्राइज़ 1,627 करोड़ रुपये रहा। ख़ास बात यह है कि 10 सीमावर्ती और पूर्वोत्तर राज्यों की डेयरी सहकारी समितियां 196 सैन्य इकाइयों को 6.44 करोड़ लीटर ताजा दूध की आपूर्ति कर रही हैं। कुल मिलाकर 2025-26 में 22.60 करोड़ लीटर दूध की आपूर्ति हुई।
किसे होता है फायदा?
NCDFI के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह के अनुसार इस साझेदारी से तीनों पक्षों को फायदा होता है:
1.रक्षा प्रतिष्ठानों को भरोसेमंद और फुल क्वालिटी सप्लाई मिलती है
2.सहकारी समितियों को संस्थागत बाजार और बुनियादी ढांचे का बेहतर इस्तेमाल मिलता है
3.डेयरी किसानों को नियमित आमदनी और बड़े बाज़ार तक पहुंच मिलती है
सीमावर्ती इलाकों में बड़ा बदलाव
भारतीय सेना के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल मुकेश चड्ढा ने सीमावर्ती क्षेत्रों में डेयरी सहकारिता को मज़बूत करने के NDDB के प्रयासों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि इससे:
1.स्थानीय रोजगार और आजीविका के अवसर पैदा होते हैं
2.पलायन रुकता है और लोग गांवों में लौटते हैं
3.टिकाऊ बाजार तैयार होते हैं
सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए:
1.ताजा दूध आपूर्ति बढ़ाना: जहां संभव हो, वहां ताजे दूध की आपूर्ति बढ़ाई जाएगी ताकि UHT (लंबी अवधि तक चलने वाले) दूध पर निर्भरता कम हो सके।
2.UHT दूध जारी रखना: रणनीतिक ज़रूरतों वाले इलाकों में UHT दूध (जो 4.11 करोड़ लीटर है) की आपूर्ति जारी रहेगी।
3.डिजिटल कोऑर्डिनेशन : सप्लाई व्यवस्था में टेक्नोलॉजी का बेहतर इस्तेमाल किया जाएगा।
4.प्रोडक्ट डाइवर्सिफिकेशन : केवल दूध ही नहीं, बल्कि दूसरे डेयरी प्रोडक्ट्स की आपूर्ति पर भी फोकस दिया जाएगा।
क्यों है यह ख़ास?
डॉ. शाह के शब्दों में, ‘आपूर्ति किया जाने वाला हर एक्स्ट्रा लीटर दूध, डेयरी किसानों और देश की सेवा करने वाले जवानों को एक-दूसरे के करीब लाता है।’
यह साझेदारी सिर्फ व्यापारिक नहीं, बल्कि देशभक्ति और सामाजिक विकास का भी प्रतीक है। जहां एक ओर जवान सीमा पर देश की रक्षा करते हैं, वहीं दूसरी ओर किसान उन्हें पोषक आहार उपलब्ध कराकर उनकी सेहत का ख्याल रखते हैं।
यह पहल दिखाती है कि सहकारिता के ज़रिए कैसे देश के दोरहे विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है। एक ओर ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है, तो दूसरी ओर राष्ट्रीय सुरक्षा को भी समर्थन मिलता है।
ये भी पढ़ें: बिहार में मछली पालन की नई क्रांति: सीतामढ़ी में खुला राज्य का पहला Fish Brood Bank
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

