उत्तर प्रदेश की त्वरित मक्का विकास योजना: किसानों को आधुनिक मशीनों पर भारी अनुदान देने की घोषणा

उत्तर प्रदेश सरकार त्वरित मक्का विकास योजना के तहत मक्का को इथेनॉल उत्पादन के लिए भी बढ़ावा दे रही है। केंद्र सरकार ने पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिक्सचर का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए मक्का एक महत्वपूर्ण फीडस्टॉक है।

उत्तर प्रदेश के मक्का किसानों के लिए एक सुनहरा मौका आया है। राज्य सरकार ने ‘त्वरित मक्का विकास योजना’ के तहत किसानों को आधुनिक मशीनों पर भारी अनुदान देने की घोषणा की है। ये योजना न केवल मक्का उत्पादन बढ़ाने पर फोकस करती है, बल्कि कटाई के बाद होने वाले कामों को आसान बनाकर किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखती है।

क्या है त्वरित मक्का विकास योजना?

उत्तर प्रदेश सरकार ने साल 2027 तक मक्का उत्पादन को बढ़ाकर 27.30 लाख मीट्रिक टन करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस स्कीम के तहत किसानों को Agricultural Mechanization को बढ़ावा देकर फसल की प्रोसेसिंग में मदद दी जाएगी। कृषि विभाग के अनुसार, केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि फसल का बेहतर प्रोसेसिंग और डिस्ट्रीब्यूशन भी किसानों की आमदनी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है।

किन मशीनों पर मिलेगा अनुदान?

योजना के तहत किसानों को आधुनिक कृषि मशीनों पर अनुदान दिया जाएगा:

  • मक्का शेलर: इस मशीन की मदद से कम समय में दानों को भुट्टों से अलग किया जा सकेगा, जिससे मेहनत और वक्त दोनों की बचत होगी। इस पर अधिकतम 40,000 रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा।

  • बैच ड्रायर: मक्का की कटाई के समय उसमें 30 फीसदी तक नमी होती है। अगर इसे सही तरीके से नहीं सुखाया गया तो फंगस लगने का ख़तरा बढ़ जाता है। ड्रायर मशीन से नमी को कंट्रोल किया जा सकेगा और भंडारण के दौरान फसल ख़राब होने से बचाया जा सकेगा। इस मशीन पर 12 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है।

  • पॉपिंग मशीन: इस मशीन के ज़रीये से किसान मक्का से सीधे पॉपकॉर्न तैयार कर बाजार में बेच सकते हैं। इस पर 10,000 रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा।

कैसे बढ़ेगी किसानों की आमदनी?

इस योजना से किसानों को कई तरह से लाभ मिलेगा:

1.श्रम लागत में कमी: आधुनिक मशीनों से कटाई के बाद होने वाले कार्यों में कम समय और कम श्रम लगेगा, जिससे उत्पादन लागत घटेगी।

2.गुणवत्ता में सुधार: सही तरीके से सुखाए गए मक्का की गुणवत्ता बेहतर होगी और बाजार में उसे बेहतर कीमत मिल सकेगी।

3.मूल्य संवर्धन: किसान अब कच्चा मक्का बेचने के बजाय पॉपकॉर्न जैसे Value Added Products  तैयार कर अतिरिक्त आमदनी कमा सकते हैं।

स्वरोजगार के अवसर: ग्रामीण स्तर पर छोटे कृषि उद्यमों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे नए रोजगार के अवसर विकसित होंगे।

कैसे करें अप्लाई?

योजना का लाभ लेने के लिए किसानों का कृषि विभाग में रजिस्ट्रेशन होना ज़रूरी है। इच्छुक किसान विभाग के आधिकारिक पोर्टल https://agriculture.up.gov.in/ पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। ऑफलाइन आवेदन के लिए जिला कृषि विभाग से भी कॉन्टेक्ट किया जा सकता है। आवेदन की लास्ट डेट 10 अगस्त है।

क्या है सरकार का दूरगामी लक्ष्य?

उत्तर प्रदेश सरकार अब मक्का को इथेनॉल उत्पादन के लिए भी बढ़ावा दे रही है। केंद्र सरकार ने पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिक्सचर का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए मक्का एक महत्वपूर्ण फीडस्टॉक है। राज्य में पहले से ही 15 कंपनियां इथेनॉल का प्रोडक्शन कर रही हैं। इसके अलावा, पर्यटन स्थलों पर पॉपकॉर्न, बेबी कॉर्न और स्वीट कॉर्न की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार इन फसलों की खेती को भी प्रोत्साहित कर रही है।

राज्य सरकार का लक्ष्य

आज के वक्त में उत्तर प्रदेश में मक्का का औसत उत्पादन 21.63 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, जबकि तमिलनाडु में यह 59.39 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। राज्य सरकार का लक्ष्य इस अंतर को कम करना और उत्पादकता बढ़ाना है।

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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