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भारत के किसानों के लिए एक सुनहरी ख़बर है। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) ने अपनी अत्याधुनिक रेडिएशन तकनीक (Radiation Technology) से 15 अलग-अलग फसलों की 72 उन्नत किस्में विकसित की हैं। ये केवल आम किस्में नहीं, बल्कि ‘Trombe varieties’ कहलाने वाली ख़ास फसलें हैं, जो मौसम की मार, बीमारियों और कम पानी में भी किसानों को भरपूर फसल देने का वादा करती हैं।
कैसे काम करती है रेडिएशन तकनीक?
आप सोच रहे होंगे कि nuclear radiation का खेती से क्या संबंध? दरअसल, BARC के वैज्ञानिकों ने गामा विकिरण (Gamma Radiation) का उपयोग करके फसलों के बीजों में आनुवांशिक बदलाव किए हैं। इस प्रोसेस में बीजों को हल्के विकिरण के कॉन्टेक्ट में लाया जाता है, जिससे उनके डीएनए में ऐसे बदलाव होते हैं जो प्राकृतिक रूप से होने में सालों लग जाते हैं।
ख़ास बात: इस तकनीक से फसलों पर कोई निगेटिव प्रभाव नहीं पड़ा है। सरकार के अनुसार, दशकों के गहन शोध और परीक्षण के बाद ही इन किस्मों को मंजू़री दी गई है।
BARC की उपलब्धि का Detailed Description
अगर हम इन 72 किस्मों पर गौर करें तो पता चलता है कि BARC ने सबसे ज्यादा मूंगफली की कुल 17 किस्में विकसित की हैं, जो किसानों के लिए एक बड़ी राहत है। उसके बाद धान की 10 किस्में आती हैं, जो देश के चावल उत्पादन को और बढ़ावा देंगी। इसके अलावा मूंग और सरसों की 9-9 किस्में विकसित की गई हैं, जबकि उड़द की 8 और अरहर की 5 उन्नत किस्में तैयार की गई हैं। इन प्रमुख फसलों के अलावा BARC ने ज्वार, लोबिया, गेहूं, सोयाबीन, केला, तिल, अलसी, सूरजमुखी और जूट जैसी दूसरी अहम फसलों की भी कुल 14 उन्नत किस्में विकसित की हैं, ताकि हर तरह के किसान को इस तकनीक का फायदा मिल सके।
इन किस्मों में क्या है ख़ास?
BARC की इन ट्रॉम्बे किस्मों में कई अद्भुत गुण विकसित किए गए हैं:
1.ज़्यादा प्रोडक्शन -: पारंपरिक किस्मों की तुलना में कहीं ज्यादा पैदावार
2.बड़े आकार के बीज -: बाजार में बेहतर कीमत
3.कम समय में पकना -: जल्दी तैयार होने वाली फसल
4.सूखा सहनशीलता -: कम पानी में भी हरी-भरी फसल
5.अत्यधिक गर्मी सहनशीलता-: बढ़ते तापमान में भी बेहतर प्रदर्शन
6.मिट्टी की लवणता सहने की क्षमता -: खारी मिट्टी में भी खेती
7.रोग प्रतिरोधक क्षमता -: कीटनाशकों पर कम निर्भरता
सरकार और वैज्ञानिकों का साथ
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने लोकसभा में बताया कि इन किस्मों को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के सहयोग से देशभर में फैलाया जा रहा है। इन फसलों को कई सालों तक अलग-अलग क्षेत्रों में परखा गया और बेहतर परिणाम मिलने के बाद ही किसानों तक पहुंचाया गया।
किसानों तक पहुंच की कवायद
परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) ने इन किस्मों को हर गांव तक पहुंचाने के लिए कई कदम उठाए हैं:
- गुणवत्तापूर्ण बीजों का बड़े पैमाने पर उत्पादन
- किसानों को मिनीकिट (Mini-kits) का वितरण
- खेतों में प्रदर्शन कार्यक्रम
- कृषि विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर प्रशिक्षण
- उन्नत तकनीक की जानकारी देने के लिए कार्यशालाएं
क्यों है ये ख़बर महत्वपूर्ण?
भारत जैसे कृषि प्रधान देश में जहां 60 फीसदी से ज़्यादा आबादी खेती पर निर्भर है, वहां जलवायु परिवर्तन और बढ़ती आबादी के बीच फसल उत्पादन बढ़ाना सबसे बड़ी चुनौती है। BARC की ये पहल न केवल खाद्य सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि किसानों की आमदनी भी बढ़ाएगी।
परमाणु ऊर्जा का ये शांतिपूर्ण इस्तेमाल दिखाता है कि कैसे विज्ञान किसानों की ज़िदगी को बदल सकती है। ये ट्रॉम्बे किस्में आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में मील का पत्थर साबित हो रही हैं।
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