नागालैंड में AI क्रांति: अब मिथुन पशुओं के व्यवहार को Real Time में पहचानेगा Artifical Intelligence

परंपरागत रूप से, पशुओं के व्यवहार की निगरानी मैन्युअल की जाती थी, जिसमें काफी वक्त और मेहनत लगती थी। ख़ासकर रात के वक्त। लेकिन अब AI ने इस चुनौती को हल कर दिया है। 

नागालैंड (Nagaland) स्थित ICAR-राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केंद्र (ICAR-National Research Centre on Mithun) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी AI-बेस्ड सिस्टम (Artifical Intelligence) डेवलप किया है, जो मिथुन पशुओं (methuen Animal) के व्यवहार को रियल-टाइम में ट्रैक (Track in Real-Time) कर सकती है। ये टेक्नोलॉजी न केवल पशुओं की सेहत का ख्याल रखेगी, बल्कि किसानों की आजीविका भी सुधारेगी। 

क्यों है ये खोज इतनी ख़ास?

मिथुन, जिसे ‘पहाड़ों का मवेशी’ (methuen Animal) भी कहा जाता है, नॉर्थईस्ट इंडिया के आदिवासी समुदायों के लिए सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से काफी अहम है। ये उनकी फूड सिक्योरिटी और रोजगार का आधार है। परंपरागत रूप से, पशुओं के व्यवहार की निगरानी मैन्युअल की जाती थी, जिसमें काफी वक्त और मेहनत लगती थी। ख़ासकर रात के वक्त। लेकिन अब AI ने इस चुनौती को हल कर दिया है। 

रिसर्चर्स ने नागालैंड (Nagaland) स्थित ICAR फार्म के दो शेड्स में 12 हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे लगाए, जो Infrared Technology से लैस हैं, जिससे दिन और रात लगातार निगरानी हो सकी। इन कैमरों की मदद से 3,000 से ज़्यादा मैन्युअल रूप से क्लासीफाइड इमेज का एक काफी बड़ा डेटासेट तैयार किया गया, जिसमें मिथुन (methuen Animal) के चार ख़ास व्यवहार जिसमें भोजन करना, खड़े रहना, बैठना और माउंटिंग (Reproductive behavior) को शामिल किया गया। 

AI बेस्ड इस सिस्टम में व्यवहार की पहचान के लिए YOLOv8n मॉडल का इस्तेमाल किया गया है, जो काफी सटीकता के साथ पशुओं की एक्टिविटी को पहचानता है, जबकि DeepSORT तकनीक वीडियो के कई तरह के फ्रेम्स में हर एक पशु को उसकी खा़स पहचान बनाए रखते हुए अलग-अलग ट्रैक करती है, भले ही वो भीड़ में हो या कैमरे से आंशिक रूप से छिपा हुआ हो। 

रिज़ल्ट चौंकाने वाले 

इस सिस्टम के रिज़ल्ट वाकई चौंकाने वाले हैं, क्योंकि YOLOv8n मॉडल ने mAP@0.5 पर 99.5 प्रतिशत की मीन एवरेज प्रिसीजन और 99.6 प्रतिशत का रिकॉल हासिल किया है, और NVIDIA RTX 3060 ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट पर ये लगभग 31 फ्रेम प्रति सेकंड की प्रोसेसिंग गति दर्ज करता है, जो रियल-टाइम यूज़ की इसकी हैरान करने वाली पावर को दिखाता है।

यह अहम स्टडी इंजीनियरिंग रिसर्च एक्सप्रेस के वॉल्यूम 8 (2026), आर्टिकल 175213 में पब्लिश हुआ है और ये आईसीएआर-राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केंद्र (ICAR-National Research Centre on Mithun) के वैज्ञानिकों द्वारा NIT Nagaland, Nagaland University, and Christ  (Deemed-to-be University) के रीसर्चर्स की मदद से पूरा किया गया है।

Artificial Intelligence और Animal Science का अद्भुत संगम

AI अब केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पहाड़ों, खेतों और पशुओं के बीच भी अपनी जगह बना रहा है, और ये तकनीक किसानों को मज़बूत बनाएगी, पशुओं की सेहत सुधारेगी, और भारत के पशुपालन क्षेत्र को आत्मनिर्भरता में मददगार होगी। ये रिसर्च साफ तौर से बताती है कि Artificial Intelligence और Animal Science का ये अद्भुत संगम न केवल पशुपालन में एक नए युग की शुरुआत कर रहा है, बल्कि ये नॉर्थ ईस्ट भारत (North East India) के लाखों किसानों और आदिवासी समुदायों के जीवन को बदलने की ताकत भी रखता है।

 

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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