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बिहार के किसानों के लिए एक सुनहरा अवसर आया है। ग्लोबल सुपरफूड मखाना अब बिहार के 21 जिलों में अपनी पहचान बनाएगा। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने ‘मखाना विकास योजना’ के तहत इस बड़े विस्तार की घोषणा की है। अब राज्य के आधे से ज्यादा जिलों में मखाने की खेती होगी।
नए जिलों में दरभंगा, मधुबनी, कटिहार, पूर्णिया, सहरसा, सुपौल, किशनगंज, सीतामढ़ी, मधेपुरा, अररिया, खगड़िया, समस्तीपुर, भागलपुर, सारण, सीवान, गोपालगंज, पूर्वी-पश्चिमी चंपारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली और पटना शामिल हैं। यह कदम बिहार को मखाना प्रोडक्शन का ग्लोबल सेंटर बनाने की दिशा में बड़ी पहल है।
मिलेगी 75 फीसदी सब्सिडी
सरकार ने किसानों को खेती के लिए लागत का 75 फीसदी तक DBT देने का फैसला किया है। प्रति हेक्टेयर 97,000 रुपये की लागत पर किसानों को 72,750 रुपये की मदद दो किस्तों में दी जाएगी। ये रकम सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी।
उन्नत बीज और मॉडर्न टेक्निक
अब किसानों को ‘सबौर मखाना-1’ और ‘स्वर्ण वैदेही’ जैसी उन्नत किस्म के बीज मिलेंगे। सरकार पारंपरिक तालाब सिस्टम के साथ-साथ खेत प्रणाली (field-based cultivation) को भी बढ़ावा दे रही है।
प्रोसेसिंग से जुड़ी बड़ी सब्सिडी
सरकार अब किसानों को सिर्फ कच्चा मखाना (गुड़ी) बेचने तक सीमित नहीं रखना चाहती। वैल्यू ऐडेड और प्रोसेसिंग पर ख़ास ज़ोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) के तहत 3.5 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है।
30 फीसदी महिला भागीदारी
बिहार सरकार इस योजना पर अगले दो सालों में लगभग 17 करोड़ रुपये खर्च करेगी। महिला सशक्तिकरण पर भी ध्यान देते हुए, 30 फीसदी लाभांश महिला किसानों को दिया जाएगा। किसान, FPO और महिला स्वयं सहायता समूह horticulture.bihar.gov.in और बिहार कृषि ऐप के ज़रीये से ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं।
किसानों के लिए नई संभावनाएं
मखाना अब ‘मिथिला मखाना’ के GI टैग के साथ अमेरिका, यूरोप, खाड़ी देशों और पूर्वी एशिया के बाजारों में अपनी पहचान बना रहा है। यह किसानों के लिए रोजगार, बिज़नेस और आत्मनिर्भरता का रास्ता खोलता है।
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।
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