E-Samudra से बदलेगा समुद्री प्रशासन का तरीक़ा, नाविकों के लिए सिंगल विंडो डिजिटल सेवाएं शुरू

E-Samudra लॉन्च से भारत का समुद्री प्रशासन होगा डिजिटल, नाविकों को मिलेंगी आसान सेवाएं और 24×7 grievance redressal की सुविधा।

भारत ने समुद्री क्षेत्र में डिजिटल बदलाव की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए E-Samudra डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। इस प्लेटफॉर्म के जरिए नाविकों, शिपिंग कंपनियों, बंदरगाहों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े अन्य stakeholders के लिए कई सेवाओं को एक ही डिजिटल सिस्टम से जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य समुद्री प्रशासन को आसान, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है।

8 अगस्त 2026 को मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय stakeholder interaction कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने E-Samudra का उद्घाटन किया। कार्यक्रम का आयोजन मंत्रालय के तहत Directorate General of Maritime Administration ने “Seafarer Security, Safety and Welfare and Inauguration of E-Samudra” विषय पर किया।

एक प्लेटफॉर्म पर मिलेंगी समुद्री सेवाएं

E-Samudra को एक comprehensive digital platform के तौर पर विकसित किया गया है। इसमें maritime sector से जुड़ी सेवाओं को single digital window के जरिए उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसमें end-to-end workflows, online payments, real-time tracking और digitally issued certificates जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

MoPSW के सचिव विजय कुमार ने बताया कि E-Samudra का उद्देश्य केवल प्रक्रियाओं को ऑनलाइन करना नहीं है, बल्कि उन्हें predictable, transparent और time-bound बनाना है। इससे नाविकों को सरकारी सेवाओं के लिए physical offices पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने बताया कि भारत की maritime policy तीन प्रमुख आधारों पर आगे बढ़ रही है। इनमें Merchant Shipping Act, 2025, Maritime Amrit Kaal Vision 2047 और Minimum Government, Maximum Governance का सिद्धांत शामिल है। Merchant Shipping Act, 2025 में seafarers को Key Workers के रूप में मान्यता दी गई है।

E-Samudra से बदलेगा समुद्री प्रशासन का तरीक़ा, नाविकों के लिए सिंगल विंडो डिजिटल सेवाएं शुरू

नाविकों की सुरक्षा और welfare पर ज़ोर

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि भारत के maritime sector के विकास में seafarers की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हर भारतीय नाविक सुरक्षित, सम्मानित और समर्थ होना चाहिए।

सोनोवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में Maritime India Vision 2030 और Maritime Amrit Kaal Vision 2047 के तहत समुद्री क्षेत्र में बदलाव किए जा रहे हैं। इसी दिशा में E-Samudra को नाविकों के लिए Ease of Living और maritime sector के लिए Ease of Doing Business को बेहतर बनाने वाली पहल के रूप में पेश किया गया है।

भारत इस समय दुनिया में seafarers की आपूर्ति करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है। सरकार को उम्मीद है कि भारत जल्द ही दुनिया का सबसे बड़ा seafarer supplier बन सकता है। इसके अलावा भारत दुनिया का प्रमुख ship recycling destination भी बन चुका है और top five shipbuilding nations में शामिल होने की दिशा में काम कर रहा है।

2013 से तीन गुना से ज़्यादा हुआ seafarer workforce

भारत के active seafarer workforce में भी पिछले वर्षों में काफी वृद्धि हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 2013 में देश में क़रीब 1.03 लाख active seafarers थे, जो 2025 में बढ़कर 3.23 लाख से अधिक हो गए।

इतनी बड़ी workforce को देखते हुए digital service delivery, regulation और welfare systems को मज़बूत करना ज़रूरी हो गया है। E-Samudra इसी बढ़ती ज़रूरत को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है।

Director General of Maritime Administration श्याम जगन्नाथन ने E-Samudra को maritime administration को physical office-based model से Digital First और Faceless Governance की ओर ले जाने वाला platform बताया। उनके अनुसार अब जहाज पर मौजूद नाविक भी सरकारी सेवाओं तक उसी तरह पहुंच बना सकेगा जैसे कोई व्यक्ति ज़मीन पर रहकर सेवाओं का इस्तेमाल करता है।

24×7 grievance redressal समेत कई नई पहल

E-Samudra के साथ maritime administration से जुड़ी कई अन्य पहलों को भी सामने रखा गया। इनमें e-NAVIK 24×7 grievance redressal system, Seafarer Tracking Dashboard, Digital Seafarers Employment Agreement यानी d-SEA और Seafarers Welfare Fund Society के तहत enhanced welfare measures शामिल हैं।

सरकार का उद्देश्य नाविकों की समस्याओं का समय पर समाधान करना और उनकी welfare services को मज़बूत करना है। इसके साथ ही recruitment, employment, regulatory compliance और career development से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

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संकट के समय 4 हजार से अधिक नाविकों की सुरक्षित वापसी

कार्यक्रम में हाल के geopolitical disruptions के दौरान Directorate General of Maritime Administration की भूमिका की भी जानकारी दी गई। मंत्रालय के अनुसार DGMA ने 16,000 से अधिक vessel calls की निगरानी की, 40,000 से ज़्यादा communications को संभाला और 4,000 से अधिक फंसे हुए भारतीय seafarers की सुरक्षित repatriation में सहयोग किया।

इस काम में विदेश मंत्रालय, भारतीय missions, भारतीय नौसेना, shipowners और अन्य maritime stakeholders के साथ मिलकर काम किया गया।

महिला नाविकों और well being पर भी फ़ोकस

नाविकों के physical और mental wellbeing को ध्यान में रखते हुए “Sagar Mein Yog” पहल का भी उल्लेख किया गया। इसके अलावा “Sagar Mein Samman” के जरिए women seafarers के लिए opportunities और support को मज़बूत करने पर ज़ोर दिया गया है।

सरकार के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में women seafarers की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसे maritime workforce में बढ़ती inclusivity के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान सर्बानंद सोनोवाल ने recruitment and placement services, maritime stakeholders, cadets और युवा maritime professionals से बातचीत भी की। उन्होंने recruitment, employment, welfare और career से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की और युवा नाविकों से safety, professionalism, dignity और continuous learning को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।

डिजिटल समुद्री प्रशासन की ओर बड़ा कदम

E-Samudra भारत के maritime governance को technology-enabled और citizen-centric बनाने की दिशा में एक अहम पहल है। एक common digital platform पर कई सेवाओं को जोड़ने से service delivery को बेहतर बनाने, transparency बढ़ाने और compliance से जुड़ी परेशानियों को कम करने की उम्मीद है।

सरकार के अनुसार E-Samudra के जरिए समुद्री क्षेत्र में digital governance को मज़बूत किया जाएगा और नाविकों की सुरक्षा, welfare तथा service delivery को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

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