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धान की खेती में जलवायु परिवर्तन की बड़ी चुनौती का समाधान खोजा जा रहा है। डीप-टेक कंपनी मिट्टी लैब्स (Deep-tech company Mitti Labs) और Google के बीच पांच साल का समझौता हुआ है। जिसके तहत भारत के एक लाख हेक्टेयर धान के खेतों में पानी की बचत और मीथेन-कटौती तकनीक (Methane-reduction technology) अपनाई जाएगी। इसका फायदा 70 हजार से ज़्यादा छोटे किसानों तक पहुंचाने का टारगेट है।
धान के खेतों में बदलाव क्यों ज़रूरी है?
पारंपरिक धान की खेती में खेतों में लंबे वक्त तक पानी भरा रहता है। इससे मिट्टी में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और मीथेन गैस बनती है। मीथेन एक काफी पावरफुल ग्रीनहाउस गैस है, जो कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में कहीं ज़्यादा तेजी से धरती का तापमान बढ़ाती है। दुनिया में मानव-जनित मीथेन उत्सर्जन (Anthropogenic methane emissions) का 10 फीसदी से ज़्यादा हिस्सा धान की खेती से आता है। इसलिए धान के खेतों से मीथेन कम करना जलवायु परिवर्तन की रफ्तार को धीमा करने के लिए बेहद ज़रूरी है।
क्या है टेक्नोलॉजी और कैसे काम करेगी?
मिट्टी लैब्स ‘अल्टरनेट वेटिंग एंड ड्राइंग’ (AWD) टेक्नोलॉजी को बढ़ावा दे रही है। इसमें खेतों में लगातार पानी भरने के बजाय ज़रूरत के अनुसार पानी दिया जाता है और बीच-बीच में खेत को सूखने दिया जाता है। कंपनी का दावा है कि इस तरीके से धान के खेतों से निकलने वाली मीथेन को 50 फीसदी तक कम किया जा सकता है और सिंचाई के पानी की खपत करीब 40 फीसदी तक घटाई जा सकती है। सबसे बड़ी बात यह है कि इससे धान की पैदावार पर कोई असर नहीं पड़ता।
सैटेलाइट और AI से होगी निगरानी
मिट्टी लैब्स अपनी ‘Geo-AI’ Technology का इस्तेमाल कर रही है, जिसे नासा के सहयोग से विकसित किया गया है। ये तकनीक हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट रडार डेटा और खेतों से जुटाई गई ज़मीनी जानकारी को मिलाकर हर छोटे खेत की स्थिति को समझती है। इससे फसल की सेहत, मिट्टी में नमी और खेत में पानी भरने की कंडीशन का सटीक आकलन होता है। कंपनी इन आंकड़ों को ‘Digital Twin’ डेटासेट के रूप में डेवलप करना चाहती है, जिससे दुनिया भर के लाखों धान के खेतों की डिजिटल जानकारी तैयार की जा सके।
कार्बन क्रेडिट का बड़ा सौदा
इस पार्टनरशिप के तहत मिट्टी लैब्स साल 2030 तक गूगल को 10 लाख हाई-क्वालिटी कार्बन क्रेडिट उपलब्ध कराएगी। ये धान की खेती से मीथेन कम करने वाले कार्बन क्रेडिट का अब तक का सबसे बड़ा खरीद समझौता बताया जा रहा है। कंपनी को अपने मीथेन-बेस्ड कार्बन क्रेडिट के लिए रेटिंग एजेंसी सिल्वेरा से ‘A’ रेटिंग भी मिली है, जो इस बात का भरोसा दिलाती है कि उत्सर्जन में कमी वास्तविक और मापने योग्य है।
पानी की बचत: बेंगलुरु के तीन साल के बराबर
भारत के कई हिस्सों में खेती के लिए पानी की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है। धान ऐसी फसल है जिसमें बहुत पानी लगता है। इस कार्यक्रम से अरबों लीटर पानी बचाने का अनुमान है, जो बेंगलुरु शहर की तीन साल की पानी की जरूरत के बराबर है।
गूगल और मिट्टी लैब्स का नज़रिया
मिट्टी लैब्स का मॉडल मीथेन कम करने, पानी बचाने और छोटे किसानों को बेहतर Water management technology अपनाने में मदद कर सकता है। मिट्टी लैब्स के को-फाउंडर जेवियर लागुआर्टा के मुताबिक, धान की खेती से मीथेन कम करना जलवायु पर पड़ने वाले असर को घटाने का एक प्रभावी तरीका है और गूगल के साथ पार्टनरशिप से इस काम को बड़े लेवल तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
ये साझेदारी भारत के छोटे किसानों के लिए एक बड़ी उम्मीद लेकर आई है। अगर यह मॉडल बड़े स्तर पर सफल होता है, तो इससे न केवल पानी की बचत होगी और मीथेन उत्सर्जन घटेगा, बल्कि किसानों की आमदनी में भी इजाफा हो सकता है।
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