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भारत सरकार किसानों के हित में एक मजबूत बीज कानून (Seed Act) लाने की तैयारी कर रही है। ये कानून नकली और घटिया बीजों से किसानों को बचाने के लिए बनाया जा रहा है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली के कृषि भवन में देशभर के किसान संगठनों के नेताओं के साथ चर्चा की। लगभग सभी राज्यों के प्रतिनिधियों ने इस बैठक में हिस्सा लिया और प्रस्तावित कानून पर अपने अनुभव और सुझाव शेयर किए। करीब 20 किसान संगठनों ने अपनी इस पर राय दी। बैठक में कृषि सचिव अतीश चंद्रा और कई अधिकारी भी मौजूद रहे।
पुराना कानून 1966 का, बदलाव ज़रूरी
कृषि मंत्री ने कहा कि मौजूदा बीज अधिनियम 1966 में बना था और बीज नियंत्रण आदेश 1983 में लागू हुआ। पिछले छह दशकों में कृषि में बड़े बदलाव हुए हैं, इसलिए पुराना ढांचा नई चुनौतियों से निपटने में सक्षम नहीं है। नकली और खराब बीजों की बिक्री और जिम्मेदारी तय करने में परेशानी जैसी समस्याएं बढ़ी हैं। सरकार ने मसौदा बीज अधिनियम (Seed Act) पर सुझाव मांगे थे। अब किसान संगठनों से सीधे सुझाव लेने का प्रोसेस फिर शुरू हो गया है।
70 फीसदी बीज मौजूदा कानून से बाहर
कृषि मंत्री शिव राज सिंह चौहान ने बताया कि देश में करीब 70 फीसदी बीज मौजूदा बीज अधिनियम के दायरे से बाहर हैं। राज्यों में बीज संबंधी प्रक्रियाएं अलग-अलग हैं और सजा के प्रावधान भी कमजोर हैं। इसलिए नकली और घटिया बीजों के खिलाफ मजबूत, प्रभावी और एक समान Regulatory framework बनाने के लिए नया कानून ज़रूरी है।
किसानों के पारंपरिक बीज अधिकार सुरक्षित
मंत्री ने साफ किया कि प्रस्तावित कानून किसानों के मौजूदा अधिकारों को सीमित नहीं करेगा। किसान पारंपरिक और अपनी किस्म के बीजों का इस्तेमाल, आदान-प्रदान और बिक्री करते रहेंगे। पारंपरिक बीजों के लिए रजिस्ट्रेशन Mandatory नहीं होगा। किसान चाहें तो अपने इच्छा से अपनी किस्मों का रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। खुद के इस्तेमाल, गांव में वितरण या कंपनी के लिए बीज बनाने वाले किसान को डिजिटल रजिस्ट्रेशन की ज़रूरत नहीं होगी।
गंभीर अपराधों पर 30 लाख तक जुर्माना और जेल
प्रस्तावित कानून में अपराधों को तीन कैटेगरी में बांटा गया है। मामूली उल्लंघन पर पहली बार चेतावनी और दूसरी बार 50,000 रुपये तक जुर्माना और जानबूझकर किए गए उल्लंघन जैसे QR कोड न लगाना, जरूरी डेटा न देना या गलत ब्रांडिंग पर पहली बार 1 लाख और दूसरी बार 2 लाख रुपये जुर्माना।
गंभीर अपराधों में नकली बीज बेचना, बिना रजिस्ट्रेशन बिज़नेस करना या जानबूझकर धोखाधड़ी पर 30 लाख रुपये तक जुर्माना और जेल की सजा हो सकती है। शिव राज सिंह चौहान ने कहा कि ये सख्त प्रावधान अवैध बीज व्यापार में लिप्त लोगों के लिए मजबूत रोक साबित होंगे।
100 फीसदी रजिस्ट्रेशन और QR कोड से ट्रैसेबिलिटी
नए कानून के तहत सभी बीजों और रोपण सामग्री का राष्ट्रीय रजिस्टर में रजिस्ट्रेशन कराना होगा। बिना रजिस्ट्रेशन वाले बीज अवैध होंगे और बाजार में नहीं बेचे जा सकेंगे। हर बीज पैकेट पर QR कोड होगा जिससे किसान उसकी उत्पत्ति, निर्माता, लैब मंजूरी और सप्लाई चेन की जानकारी ले सकेंगे। इससे बीज खराब होने पर जिम्मेदारी तय करना आसान होगा।
राज्यों को नई किस्में जारी करने की ज़्यादा पॉवर
प्रस्तावित कानून राज्य सरकारों को राज्य स्तरीय समितियों की सिफारिश पर नई बीज किस्में जारी करने की शक्ति देगा, जबकि राष्ट्रीय मानक लागू रहेंगे।सभी किस्में एक राष्ट्रीय ऑनलाइन रजिस्टर में दर्ज होंगी, जो केंद्र और राज्य दोनों के लिए उपलब्ध होगी।
बीज सुरक्षा कोष और 15 दिन में मुआवज़ा
किसानों की मांग पर प्रस्तावित कानून में हर राज्य में बीज सुरक्षा कोष बनाने का प्रावधान है, जिसे राज्य सरकारें मैनेज करेंगी। बीज अधिनियम के तहत वसूला गया जुर्माना इन कोषों में जमा होगा।
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