महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए शिवराज सिंह चौहान ने तय किया क्रेडिट रोडमैप

शिवराज सिंह चौहान ने SHG महिलाओं और महिला उद्यमियों के लिए आसान क्रेडिट और समयबद्ध लोन का रोडमैप तय किया।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को मुंबई में Self-Help Group यानी SHG-बैंक लिंकेज और व्यक्तिगत उद्यमों के वित्तपोषण को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक Deendayal Antyodaya Yojana-National Rural Livelihoods Mission यानी DAY-NRLM के तहत आयोजित की गई। बैठक में ग्रामीण महिलाओं को तेज, पर्याप्त और आसानी से उपलब्ध क्रेडिट देने की व्यवस्था को मज़बूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई।

शिवराज सिंह चौहान ने बैठक के दौरान SHG सदस्यों को बैंक लोन लेने में आने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए हेल्पलाइन शुरू करने के निर्देश भी दिए। बैठक में SHG से जुड़ी महिलाएं, बैंक अधिकारी, State Rural Livelihood Missions के अधिकारी, RBI, NABARD और अन्य संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इस दौरान लोन प्रक्रिया में देरी, कागजी कार्रवाई, कम क्रेडिट लिमिट और बैंक शाखा स्तर पर आने वाली समस्याओं पर चर्चा की गई।

विकसित भारत के लिए महिला सशक्तिकरण ज़रूरी

बैठक को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए महिलाओं का सशक्तिकरण ज़रूरी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस लक्ष्य का भी उल्लेख किया, जिसमें Lakhpati Didis की संख्या को तीन करोड़ से बढ़ाकर छह करोड़ करने की बात कही गई है।

शिवराज सिंह चौहान ने सभी संबंधित पक्षों से इस लक्ष्य को केवल सरकारी ज़िम्मेदारी के रूप में नहीं, बल्कि देश और समाज के प्रति ज़िम्मेदारी के रूप में लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि अधिकारियों और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े लोगों को महिलाओं के जीवन में बदलाव लाने के लक्ष्य के प्रति पूरी प्रतिबद्धता और उत्साह के साथ काम करना चाहिए।

उनका ज़ोर इस बात पर था कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मज़बूत बनाने के लिए केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें ज़मीन पर प्रभावी तरीके से लागू करना भी ज़रूरी है। यही वजह है कि बैठक में महिला उद्यमिता के लिए आसान और पर्याप्त क्रेडिट उपलब्ध कराने को महत्वपूर्ण विषय बनाया गया।

महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए शिवराज सिंह चौहान ने तय किया क्रेडिट रोडमैप

3 करोड़ से 6 करोड़ Lakhpati Didis का लक्ष्य

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि तीन करोड़ Lakhpati Didis का पहला लक्ष्य हासिल करना तुलनात्मक रूप से आसान था, क्योंकि कई महिलाएं पहले से ही सालाना 60 हज़ार, 70 हज़ार या 80 हज़ार रुपये तक कमा रही थीं। अब छह करोड़ का लक्ष्य हासिल करने के लिए उन महिलाओं को भी Lakhpati Didi बनाना होगा, जिनकी सालाना कमाई 30 हज़ार, 40 हज़ार या 50 हज़ार रुपये के आसपास है।

उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र के अब तक के प्रदर्शन की सराहना भी की। उनके अनुसार, लगभग हर बैंक ने इस वर्ष अपने लक्ष्य का डेढ़ गुना काम किया है और कुछ बैंकों ने अपने लक्ष्य का दो गुना तक हासिल किया है। हालांकि, आगे भी इसी उत्साह और प्रतिबद्धता के साथ काम करने की ज़रूरत बताई गई।

हर तीन महीने होगी वर्चुअल समीक्षा

बैठक में तय किए गए लक्ष्यों और प्रतिबद्धताओं को समय पर लागू करने के लिए नियमित निगरानी की व्यवस्था पर भी ज़ोर दिया गया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि संबंधित पक्षों की हर तीन महीने में वर्चुअल बैठक होगी, जबकि हर छह महीने में फिजिकल मीटिंग आयोजित की जाएगी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य तय समयसीमा के अनुसार काम की प्रगति की समीक्षा करना और किसी भी तरह की देरी को समय रहते दूर करना है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बैठकों में निरंतरता रहने से तय समयसीमा का पालन बेहतर तरीके से किया जा सकेगा।

बैंक अधिकारियों की ट्रेनिंग और संवेदनशीलता पर ज़ोर

ग्रामीण महिलाओं के सामने बैंकिंग स्तर पर आने वाली परेशानियों को देखते हुए बैंक अधिकारियों की ट्रेनिंग और sensitisation को भी ज़रूरी बताया गया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि SHG महिलाओं की कई बड़ी समस्याएं बैंक स्तर पर सामने आती हैं, इसलिए वहां काम करने वाले अधिकारियों को इस विषय में बेहतर तरीके से प्रशिक्षित और संवेदनशील बनाने की ज़रूरत है।

उन्होंने State Rural Livelihood Missions की बैठकों में बैंकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा। खास तौर पर उन्होंने बताया कि निजी बैंकों के अधिकारियों की बैठकों और District Level Consultative Committee यानी DLCC की बैठकों में अनुपस्थिति को लेकर शिकायतें मिली हैं। ऐसे बैंकों को भी अपनी ज़िम्मेदारी को गंभीरता से निभाने की बात कही गई।

ज़रूरत वाले क्षेत्रों पर ज़्यादा ध्यान

शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा कि ज़्यादा गरीबी वाले क्षेत्रों को अधिक प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उनके अनुसार, कई बार उन क्षेत्रों में बैंक आसानी से लोन उपलब्ध करा देते हैं जहां पहले से आर्थिक स्थिति बेहतर होती है। लेकिन जहां ज़रूरत अधिक है, वहां ज़्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों और बैंकों से उन क्षेत्रों पर विशेष फ़ोकस करने को कहा जहां महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को वित्तीय सहायता की अधिक ज़रूरत है। इसका उद्देश्य महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को मज़बूत करना है।

महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए शिवराज सिंह चौहान ने तय किया क्रेडिट रोडमैप

SHG को मिलेगा बड़ा क्रेडिट सपोर्ट

DAY-NRLM के तहत अब तक 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाओं को 92 से 93 लाख Self-Help Groups में संगठित किया जा चुका है। बैंकों की ओर से SHGs को अब तक कुल 13.67 लाख करोड़ रुपये से अधिक का क्रेडिट दिया गया है। बैठक में बताया गया कि करीब 3.5 करोड़ Lakhpati Didis अब तक तैयार हो चुकी हैं और लक्ष्य छह करोड़ का है।

अगले पांच वर्षों में SHGs के लिए 10 लाख करोड़ रुपये और व्यक्तिगत महिला सदस्यों के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के लोन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। यह कदम महिला उद्यमिता को आर्थिक आधार देने और ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

Financial Inclusion 2.0 के तहत आगे की रणनीति

बैठक में हुई चर्चा को Financial Inclusion 2.0 के तहत तैयार होने वाले आगे के एक्शन प्लान में शामिल किया जाएगा। इसमें SHGs के लिए समय पर और पर्याप्त क्रेडिट, महिला उद्यमियों के लिए dedicated financing और ग्रामीण भारत में बेहतर financial services की पहुंच बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा।

शिवराज सिंह चौहान ने भरोसा दिलाया कि SHG महिलाओं को बैंक लोन लेने में आने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए हर संभव कदम उठाया जाएगा। हेल्पलाइन, प्रक्रिया में सुधार और बैंकरों के साथ लगातार समन्वय के जरिए लोन प्रक्रिया की बाधाओं को दूर करने का प्रयास किया जाएगा।

बैठक में तय रोडमैप, समयसीमा और नियमित समीक्षा के जरिए महिला सशक्तिकरण और महिला उद्यमिता को आगे बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया। लक्ष्य स्पष्ट है कि ग्रामीण महिलाओं को वित्तीय अवसरों से जोड़कर उन्हें अधिक मज़बूत बनाया जाए और विकसित भारत के निर्माण में उनकी भागीदारी को और बढ़ाया जाए।

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