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आंध्र प्रदेश सरकार (Andhra Pradesh Government) ने पोल्ट्री सेक्टर को नई उड़ान देने के लिए एपी पोल्ट्री विकास नीति 2026-29 (AP Poultry Development Policy 2026-29) को मंज़ूरी दे दी है। कृषि एवं पशुपालन मंत्री किंजरापु अच्चन्नायडू (Agriculture and Animal Husbandry Minister Kinjarappu Atchannaidu) ने विजयवाड़ा में पोल्ट्री एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से मुलाकात के बाद ये जानकारी दी। इस नीति के तहत 657 करोड़ रुपये का Financial Package रखा गया है, जिसका मकसद उत्पादन लागत घटाना, मॉडर्न टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देना और किसानों की आमदनी बढ़ाना है।
पैकेज का गणित
इस पैकेज में 209 करोड़ रुपये फूड प्रोसेसिंग प्रोत्साहन के लिए, 152.18 करोड़ रुपये Industrial components के तहत और 296 करोड़ रुपये पशुपालन विभाग की योजनाओं पर खर्च किए जाएंगे।
ब्याज और बिजली पर राहत
नई नीति का सबसे ख़ास 4 फीसदी ब्याज सब्सिडी है, जो पोल्ट्री फार्म और हैचरी के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए लिए गए कर्ज पर मिलेगी। इसके लिए तीन साल में 72 करोड़ रुपये का प्रावधान है । बिजली के बोझ को कम करने के लिए लो-टेंशन पोल्ट्री फार्मों के लिए टैरिफ 3.75 रुपये प्रति यूनिट और फीड मिक्सिंग यूनिट के लिए 4.75 रुपये प्रति यूनिट तय किया गया है।
मॉडर्न शेड पर मोटी सब्सिडी
नए एनवायरनमेंट-कंट्रोल्ड (EC) पोल्ट्री शेड बनाने पर 25 प्रतिशत तक कैपटल सब्सिडी मिलेगी, जिसकी अधिकतम सीमा 25 लाख रुपये है। पुराने शेड के आधुनिकीकरण पर भी 25 फीसदी तक सब्सिडी मिलेगी, लेकिन अधिकतम 20 लाख रुपये तक। पात्र किसानों को बिजली बिल पर 2 रुपये प्रति यूनिट तक की सब्सिडी भी मिलेगी, जिसकी सालाना सीमा 10 लाख रुपये और अवधि तीन साल होगी।
ग्रामीण महिलाओं के लिए बैकयार्ड पोल्ट्री
सरकार ने ग्रामीण महिलाओं की आमदनी बढ़ाने के लिए बैकयार्ड पोल्ट्री पर ख़ास जोर दिया है। महिला स्वयं सहायता समूहों के ज़रिए हर साल 2,720 मदर पोल्ट्री यूनिट स्थापित किए जाएंगे। SERP और DRDA के जरिए महिलाओं को ट्रेनिंग, टीकाकरण और एक दिन के चूजों की सप्लाई की जाएगी।
प्रोसेसिंग हब बनेंगे तीन शहर
चिकन और अंडे की प्रोसेसिंग के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल अपनाया जाएगा। चित्तूर, विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम को Major processing centers के रूप में डेवलप किया जाएगा।
शहरी क्षेत्रों में शेड बनाना हुआ आसान
शहरी क्षेत्रों में पोल्ट्री शेड बनाने पर लगने वाले डेवलपमेंट और बेटरमेंट चार्ज से छूट दी गई है। ग्राम पंचायतों के बराबर कम शुल्क पर मंजूरी मिलेगी।
फीड की लागत घटाने की तैयारी
मंत्री ने मक्का की बढ़ती कीमतों को पोल्ट्री उद्योग की बड़ी चुनौती बताया। सरकार केंद्र से बातचीत कर टूटे चावल (Broken Rice) को पोल्ट्री फीड में Alternative Food के तौर पर उपलब्ध कराने की कोशिश करेगी, जिससे किसानों की लागत कम हो सके।
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